नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर्ज पुनर्गठन (लोन रिस्ट्रक्चरिंग) योजना तेजी से लागू करने को लेकर गुरुवार को बैंकों और NBFCs (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) प्रमुखों के साथ बैठक की. बैठक में उन्होंने कोविड-19 से जुड़े दबाव वाले कर्ज के समाधान को लेकर तत्काल नीति पेश करने, पात्र कर्जदारों की पहचान करने और उन तक पहुंचने पर जोर दिया. सीतारमण ने इस बात पर भी जोर दिया कि समाधान योजना 15 सितंबर 2020 तक लागू हो जानी चाहिए और उसके बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए.
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए हुई बैठक में सीतारमण ने बैंकों और एनबीएफसी से कहा, ‘‘बैंक और एनबीएफसी दबाव वाले कर्ज के समाधान को लेकर तत्काल अपने-अपने निदेशक मंडल से मंजूरी प्राप्त नीति को पेश करें, पात्र कर्जदारों की पहचान करें और उन तक पहुंचें. बैंकों को प्रत्येक व्यावहारिक कंपनियों के पुनरूद्धार को लेकर तेजी से समाधान योजना को क्रियान्वित करना चाहिये.’’
उल्लेखनीय है कि लोन मोरेटोरियम 31 अगस्त को समाप्त होने के बाद दबाव वाले कर्जदारों को राहत पहुंचाने के लिये रिजर्व बैंक ने एकबारगी कर्ज पुनर्गठन की अनुमति बैंकों को दी है. बयान के अनुसार करीब तीन घंटे चली बैठक में बैंकों और एनबीएफसी प्रमुखों ने आश्वस्त किया, ‘‘वे समाधान नीति को लेकर तैयार हैं और पात्र कर्जदारों की पहचान और उन तक पहुंच को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. वे रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित समयसीमा का अनुपालन करेंगे.’’
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले महीने कहा था कि वह कंपनियों और खुदरा कर्जदारों को राहत देने के लिये कर्ज को एनपीए में डाले बिना एकबारगी पुनर्गठन की अनुमति दे रहा है. बैंक आरबीआई के नियम और पात्रता के अनुरूप निदेशक मंडल से पुनर्गठन व्यवस्था की मंजूरी लेने की प्रक्रिया में हैं. आरबीआई ने छह अगस्त को अधिसूचना जारी कर इस बारे में नियम और पात्रता मानदंड तय किये थे. कर्ज पुनर्गठन का लाभ वे लोग ले सकते हैं, जिनके नई दिल्ली: कर्ज की किस्त एक मार्च तक आ रही थी और किस्त के भुगतान में 30 दिन से अधिक देरी नहीं हुई है.

