फाइनेंस डेस्क – जीएसटी दरों में कमी के बाद सिर्फ नई कारों के दाम नहीं गिरे हैं, बल्कि पुरानी या सेकेंड हैंड कारें भी पहले से कम दाम में मिल रही हैं। ऐसे में बहुत से लोग यूज्ड कार खरीदने की सोच रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि पुरानी कार खरीदने के लिए कार लोन लेना सही रहेगा या पर्सनल लोन?
कार लोन
सिक्योर्ड लोन होता है, यानी कार गिरवी रखी जाती है और लोन चुकाने तक बैंक का हक रहता है।
ब्याज दर आमतौर पर पर्सनल लोन से कम होती है।
5 से 7 साल तक की लंबी अवधि में आसानी से चुकाया जा सकता है।
अगर क्रेडिट स्कोर अच्छा नहीं है, तब भी मिलने की संभावना ज्यादा रहती है।
लिमिटेशन यह है कि लोन की राशि कार की वैल्यू पर तय होती है। अगर कार बहुत पुरानी है, तो लोन मिलना मुश्किल होता है।
लोन खत्म होने के बाद हाइपोथिकेशन (Hypothecation) हटाने की प्रक्रिया करनी पड़ती है।
पर्सनल लोन
अनसिक्योर्ड लोन होता है, यानी कोई गिरवी नहीं रखनी पड़ती।
ब्याज दर कार लोन से ज्यादा होती है।
कार पर शुरू से ही आपका पूरा हक रहता है।
पैसों का इस्तेमाल सिर्फ कार तक सीमित नहीं, इंश्योरेंस, RTO रजिस्ट्रेशन या रिपेयरिंग पर भी कर सकते हैं।
कार चाहे कितनी भी पुरानी हो, पर्सनल लोन से खरीदी जा सकती है।
लोन की अवधि कम होती है, इसलिए EMI ज्यादा आ सकती है।
यह पूरी तरह आपकी इनकम और क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करता है।
किसे चुनें?
अगर कार 5-6 साल से ज्यादा पुरानी नहीं है और कंडीशन अच्छी है, तो कार लोन सही रहेगा – ब्याज कम और अवधि लंबी मिलेगी।
अगर कार ज्यादा पुरानी है, डीलर की बजाय किसी व्यक्ति से खरीद रहे हैं, या अतिरिक्त खर्च (इंश्योरेंस, सर्विसिंग) भी है, तो पर्सनल लोन बेहतर रहेगा – इसमें ज्यादा आजादी है।

