AMC कंपनियों द्वारा निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए कई विकल्प दिए जाते हैं। इनमें से एक है ओपन-एंडेड और क्लोज-एंडेड म्यूचुअल फंड। जोखिम और तरलता के आधार पर दोनों प्रकार के म्यूचुअल फंडों में बड़ा अंतर है।
ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड वे फंड होते हैं जिनमें शेयरों के ट्रांसफर पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं होता है। इस प्रकार के mutual fund में आप साल भर में कभी भी पैसा निवेश या निकाल सकते हैं। इस वजह से निवेशकों को open-ended mutual fund में अधिक तरलता मिलती है। open-ended mutual fund में एनएवी (Net Asset Value) दिन के अंत में समायोजित की जाती है। अधिकांश ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंडों की कोई परिपक्वता अवधि नहीं होती है।
Closed-ended mutual fund वे फंड होते हैं जिनमें यूनिटें निश्चित होती हैं। NFO के दौरान इनकी संख्या तय की जाती है. इसके बाद कोई नई यूनिट नहीं खरीदी जा सकेगी. Closed-ended mutual fund की एक निश्चित लॉक-इन अवधि होती है। ये फंड शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते हैं, जिसके बाद निवेशक इनमें कारोबार कर सकते हैं।
Open-ended mutual fund में आप कभी भी निवेश और निकासी कर सकते हैं। वहीं, Closed-ended mutual fund में एक निश्चित अवधि के बाद ही निवेश निकाला जा सकता है। Open-ended mutual fund में SIP के जरिए निवेश किया जा सकता है। लेकिन आप Closed-ended mutual fund में केवल एकमुश्त निवेश कर सकते हैं। Open-ended mutual fund में व्यय अनुपात अधिक होता है। वहीं, Closed-ended mutual fund में व्यय अनुपात कम होता है। आप Open-ended mutual fund में व्यापार नहीं कर सकते। वहीं, आप Closed-ended mutual fund में भी आसानी से कारोबार कर सकते हैं।

