वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पेश केंद्र सरकार के बजट में करदाताओं को कोई राहत नहीं दी है.अलबत्ता कुछ छोटी और बरसों से विवादित पुरानी टैक्स डिमांड को कुछ शर्तों के साथ वापस लेने का एलान किया गया है. वित्त मंत्री ने कहा है कि इससे करीब 1 करोड़ करदाताओं को लाभ होगा. बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले भी कहा था कि यह एक वोट-ऑन-अकाउंट होगा, इसमें किसी तरह के बड़े एलान की संभावना नहीं है. आम तौर पर वोट ऑन अकाउंट या अंतरिम बजट में पर्सनल टैक्स से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करने की परंपरा नहीं रही है लेकिन 2019 के अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने आय करदाताओं को बड़ी राहतें दी थीं जिसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन में इजाफा और टैक्स रिबेट के जरिए 5 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री करना शामिल था. लोग इस बार भी कुछ उसी तरह के एलान का इंतज़ार कर रहे थे लेकिन इस बजट भाषण से उन तमाम लोगों को बड़ी निराशा हाथ लगी है.
वित्त मंत्री ने पर्सनल टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए इस बजट में सिर्फ एक बड़ा एलान किया जिसके तहत ऐसी छोटी, नॉन-वेरिफाइड और विवादित डायरेक्ट टैक्स डिमांड हैं, जो बरसों से लटकी हुई हैं. इनमें कई डिमांड तो 1962 से पेंडिंग हैं, सरकार ऐसी पुरानी टैक्स डिमांड को वापस लेगी. यह लाभ 25 हजार रुपये तक की वैसी डिमांड पर मिलेगा जो वित्त वर्ष 2009-10 तक की हैं. इसी तरह जबकि वित्त वर्ष 2010-11 से 2014-15 तक की उन पुरानी विवादित डिमांड को भी वापस लिया जाएगा जिनकी राशि 10 हजार रुपये तक है.
पर्सनल टैक्स भरने वाले मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह बजट निराशाजनक रहा है. वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स स्लैब या स्टैंडर्ड डिडक्शन में कोई फेर-बदल नहीं किया है. न ही टैक्स सेविंग इनवेस्टमेंट्स की सीमा में कोई इजाफा किया गया है. होम लोन भरने वालों को भी कोई राहत नहीं दी गई है. बता दें कि न्यू टैक्स रिजीम में फिलहाल ज्यादातर टैक्स बेनिफिट नहीं मिलते हैं. लेकिन अधिकांश एक्सपर्ट्स मानना है कि कम से कम NPS में सालाना 50 हजार रुपये तक के निवेश पर मिलने वाली टैक्स की छूट को नई टैक्स रिजीम में जरूर शामिल करना चाहिए. सीनियर सिटिजन्स को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसा करना बेहद जरूरी है.

