मुंबई: वित्तीय और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के शेयरों में बिकवाली से शुक्रवार को सेंसेक्स 536 अंक टूट गया। कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में लागू लॉकडाउन से आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और फिलहाल इसमें राहत मिलती नहीं दिख रही है। इससे वैश्विक बाजारों में भी गिरावट आई। घरेलू मोर्चे पर फ्रैंकलिन टेंपलेटन म्यूचुअल फंड ने कोविड-19 संकट की वजह से निकासी के दबाव और बांड बाजार में तरलता की कमी के चलते अपनी छह बांड या डेट योजनाओं को बंद करने का फैसला किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कई खुदरा निवेशकों तथा उच्च संपदा वाले लोगों (एचएनआई) का पैसा इन योजनाओं में फंस जाएगा। इनकी वसूली कब तक हो पाएगी, इसको लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 535.86 अंक या 1.68 प्रतिशत के नुकसान से 31,327.22 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई का निफ्टी भी 159.50 अंक या 1.71 प्रतिशत के नुकसान से 9,154.40 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स की कंपनियों बजाज फाइनेंस का शेयर सबसे अधिक नौ प्रतिशत टूट गया।
एक्सिस बैंक, इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर भी नुकसान में रहे। रिलायंस इंडसट्रीज के शेयर में हालांकि तीन प्रतिशत की बढ़त रही। इससे सेंसेक्स का नुकसान कुछ कम रहा। सनफार्मा, हीरो मोटोकॉर्प, एलएंडटी, पावरग्रिड और बजाज आटो के शेयर भी लाभ में रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि फ्रैंकलिन टेंपलेटन द्वारा कुछ बांड योजनाओं को बंद करने की घोषणा से विशेष रूप बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा।

