प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऋण माफी की पेशकश से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों के प्रति केंद्रीय बैंक RBI ने जनता को आगाह किया है। आरबीआई की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि फर्जी विज्ञापन देकर लोन लेने वाले को फंसाने की कोशिश की जा रही है. ये संगठन प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी ऐसे कई अभियानों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे संस्थानों द्वारा बिना किसी अधिकार के “ऋण माफी प्रमाणपत्र” जारी करने के लिए सेवा/कानूनी शुल्क वसूलने की भी खबरें हैं। रिजर्व बैंक ने कर्ज माफी की पेशकश कर कर्जदारों को लुभाने वाले कुछ भ्रामक विज्ञापनों पर ध्यान दिया है।
आरबीआई ने आम जनता को आगाह किया कि ऐसे संस्थानों से जुड़ने से सीधे पैसे का नुकसान हो सकता है। RBI ने कहा कि जनता को आगाह किया जाता है कि वे ऐसे झूठे और भ्रामक अभियानों का शिकार न बनें और ऐसी घटनाओं की जानकारी प्रवर्तन एजेंसियों को दें। केंद्रीय बैंक ने कहा कि कुछ जगहों पर कुछ लोगों द्वारा ऋण माफी की पेशकश से संबंधित अभियान चलाए जा रहे हैं, जो अपने अधिकारों को लागू करने में बैंकों के प्रयासों को कमजोर करते हैं। ऐसे संस्थान गलतबयानी कर रहे हैं कि बैंकों समेत वित्तीय संस्थानों का बकाया चुकाने की कोई जरूरत नहीं है, ऐसी गतिविधियां वित्तीय संस्थानों की स्थिरता और जमाकर्ताओं के हितों को कमजोर करती हैं।
मुद्रास्फीति की संभावनाओं पर रिजर्व बैंक के सोमवार को जारी द्विमासिक सर्वेक्षण के अनुसार, देश में अधिकांश परिवारों को आने वाले तीन महीनों और एक साल में उच्च मुद्रास्फीति की उम्मीद है। अगले तीन महीनों में कीमतों और मुद्रास्फीति को लेकर आशंकाएं खाद्य उत्पादों और सेवाओं में अधिक देखी जा रही हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि मौजूदा मुद्रास्फीति पर परिवारों की धारणा पिछले सर्वेक्षण से 20 आधार अंक (बीपीएस) घटकर नवंबर में 8.2 प्रतिशत रह गई।

