भविष्य की हेल्थ प्रॉब्लम को लेकर देश के सीनियर सिटीजन्स आत्मनिर्भर होना चाहते हैं, इसलिए बुढ़ापा आने से पहले और बुढ़ापे की बीमारियों से निपटने के लिए लोगों में हेल्थ बीमा लेने का चलन बढ़ रहा है, बीमा कपंनियां भी इस बढ़ते रुझान का फायदा उठाने में लगी हुई हैं और अपनी योजनाओं में उनको प्राथमिकता भी दे रही है. आये दिन देश की सभी बीमा कम्पनियाँ वरिष्ठ नागरिकों के लिए नए नए प्रोडक्ट लेकर आ रही हैं, इसका फायदा ये है लोगों के पास अपना हेल्थ कवर चुनने के कई ऑप्शन भी मिलते हैं, इसके बावजूद हेल्थ पालिसी लेने से पहले उन शर्तों को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी होता है जो प्लान में जुडी हुई होती हैं, अगर आप इन्हें गौर से नहीं पढ़ेंगे और समझेंगे नहीं तो बीमा कंपनियों के झोल में फंसने का खतरा पैदा होगा और क्लेम के समय बिला वजह का विवाद पैदा होगा। आइये इन्हें थोड़ा समझते हैं.
पुरानी बीमारियों से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई बीमा कंपनियां लंबी प्रतीक्षा अवधि प्रदान करती हैं, ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य देखभाल करते समय आपको हमेशा पुरानी बीमारियों की प्रतीक्षा अवधि की जांच करनी चाहिए और ऐसी पॉलिसी चुननी चाहिए जिसमें प्रतीक्षा अवधि कम से कम हो। इसके अलावा कई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियाँ सह-भुगतान के साथ आती हैं जिसका मतलब यह होता है कि जब भी आपका क्लेम आएगा तो उसका कुछ हिस्सा आपको खुद ही चुकाना होगा। जैसे कि अगर किसी के स्वास्थ्य बीमा में 20 प्रतिशत सह-भुगतान है, तो दावा आने पर आपको 20 प्रतिशत राशि का भुगतान करना होगा। इसलिए आपको हमेशा हेल्थ पालिसी का चयन करना चाहिए जिसमें आपको हमेशा न्यूनतम सह-भुगतान करना पड़े।
कई हेल्थ बीमा कंपनियां वरिष्ठ नागरिकों को रिनिवल के लिए एक आयु सीमा प्रदान करती हैं, इस सीमा के बाद आप अपनी पॉलिसी का नवीनीकरण नहीं करा सकते। तो ऐसे में ऐसे स्वास्थ्य बीमा का चयन करना चाहिए जिसमें कोई आयु सीमा न हो। किसी भी हेल्थ इन्शुरन्स पालिसी में आपको हमेशा उस कंपनी के अस्पताल नेटवर्क की जांच ज़रूर करनी चाहिए। आपको ये मालूम होना चाहिए कि इसके नेटवर्क का अस्पताल आपके नजदीक है या नहीं?

