आर्थिक जानकार बजट से ज़्यादा उत्साहित नहीं

नई दिल्ली: एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहलाने वाले भारत को मंदी के दौर से बाहर निकालने में शायद ही नए बजट से कोई मदद मिल पाएगी। अर्थव्यवस्था के जानकारों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए गए बजट 2020 को लेकर यह राय दी है। आर्थिक जानकारों ने कहा कि सरकार ने अपने खर्च में मामूली इजाफा ही किया है, इसके अलावा इनकम टैक्स की कम कटौती भी बहुत ज्यादा उत्साह बढ़ाने वाली नहीं है

यही नहीं जानकारों ने कहा कि सरकार को 2020-21 में अपने वित्तीय घाटे के लक्ष्य को भी तय करने में मुश्किल आ सकती है। ऐसे में उसे वित्तीय संस्थानों और सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने पर मिलने वाली करीब 30 अरब डॉलर की रकम पर ही निर्भर रहना पड़ सकता है। बता दें शनिवार को पेश किए गए बजट में सरकार ने वित्तीय घाटे के लक्ष्य को कुछ कम किया है। ऐसे में उसके पास करीब 15 अरब डॉलर की रकम अतिरिक्त तौर पर खर्च करने के लिए उपलब्ध होगी।

नोमुरा से जुड़ी अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने कहा कि हम इस बजट को ग्रोथ और महंगाई के लिहाज से न्यूट्रल मानते हैं और बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं लगती। इसके अलावा रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा कि बजट में सरकार ने ग्रोथ में कमी की चुनौती को स्वीकार किया है और यह सुस्ती लंबी चल सकती है।

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