मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने कहा है कि बैंकों को पूर्वानुमान के आधार पर पहले ही पूंजी जुटा कर रखने की जरूरत इससे उनके पास कोरोना वायरस जैसे संकट के समय पर्याप्त पूंजी ‘बफर’ रहेगा।
दास ने शनिवार को भारतीय स्टेट बैंक के बैंकिंग और इकनॉमिक कान्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि सुरक्षित पूंजी कोष बनाना और पूंजी जुटाना सिर्फ ऋण के प्रवाह सुनिश्चित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे वित्तीय प्रणाली भी मजबूत होती है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में यह और महत्वपूर्ण हो जाता है कि बैंक अपने कामकाज के संचालन को सुधारे, अपनी जोखिम प्रबंधन की दक्षता को और धारदार करें। बैंकों के लिए जरूरी है कि वे स्थिति पैदा होने का इंतजार न करें और अग्रिम आधार पर पूंजी जुटाएं।’’’
दास ने कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के बैंकों को आगे बढ़कर पर्याप्त पूंजी बफर बनाना चाहिए। गवर्नर ने कहा कि लॉकडाउन के आर्थिक प्रभाव और लॉकडाउन के बाद वृद्धि दर में गिरावट से बैंकों की पूंजी घटेगी और उनकी गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बढ़ेंगी। ऐसे में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों का पुनर्पूंजीकरण जरूरी हो जाएगा। सरकार ने 2015-16 से 2019-20 के दौरान पांच साल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 3.08 लाख करोड़ रुपये डाले हैं। हालांकि, वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में सरकार ने इस तरह की कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है।

