फाइनेंस डेस्क – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने के ऐलान के अगले ही दिन गुरुवार को भारतीय रुपये में हल्की मजबूती देखने को मिली। रुपया 87.69 पर खुला, जो पिछले दिन के 87.72 के मुकाबले 3 पैसे मजबूत था।
हालांकि यह सुधार मामूली है, लेकिन व्यापारिक तनावों के बीच यह एक पॉजिटिव संकेत माना जा रहा है।
ट्रंप की सख्ती का असर
बुधवार को ट्रंप ने कहा था कि भारत पर यह टैरिफ इसलिए लगाया जा रहा है क्योंकि भारत रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखे हुए है। अब भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाली चीजों पर कुल 50% शुल्क लगेगा।
ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि जो देश रूस से तेल खरीद रहे हैं, उन्हें भी ऐसे ही दंडात्मक कदमों का सामना करना पड़ सकता है।
बाजार में बढ़ी बेचैनी
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी ने कहा,
“अगर अगले 21 दिनों में हालात नहीं सुधरे तो भारत की जीडीपी ग्रोथ 6% से नीचे जा सकती है।”
उन्होंने बताया कि रुपया पहले से ही कमजोर चल रहा है, और इस तनाव के चलते इसमें और गिरावट आ सकती है।
RBI की प्रतिक्रिया
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी हालात को देखते हुए कोई बड़ा फैसला नहीं लिया है। उसने अपनी रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखा है और मौजूदा स्थितियों पर नजर बनाए रखने की बात कही है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के अनिल कुमार भंसाली ने कहा,
“बाजार को और ज्यादा टैरिफ की उम्मीद थी, लेकिन सिर्फ 25% बढ़ोतरी हुई। इसलिए रुपया थोड़ा मजबूत हुआ।”
उन्होंने यह भी बताया कि 28 अगस्त से यह टैरिफ लागू होगा, और उससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आ सकता है बातचीत के लिए।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 67.52 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। तेल की कीमतों में यह उछाल आपूर्ति में कटौती की आशंका और ओपेक+ देशों के उत्पादन संबंधी फैसलों के कारण आया है।
भारत की सख्त प्रतिक्रिया
भारत ने अमेरिका के इस कदम को “अनुचित और अविवेकपूर्ण” बताया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा:
“हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हमारा तेल आयात हमारी जनता की ऊर्जा सुरक्षा के लिए है। यह बाजार की ज़रूरतों के हिसाब से तय होता है।”
भारत ने कहा कि जब कई देश अपने राष्ट्रीय हित में कदम उठा रहे हैं, तब सिर्फ भारत को टारगेट करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

