सेंसेक्स 50 की तुलना में इस साल छोटे शेयरों ने निवेशकों को करीब 3 गुना रिटर्न दिया. इस साल 22 दिसंबर तक बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 45.20 फीसदी बढ़ा. वहीं यहीं मिडकैप इंडेक्स 41.74 फीसदी चढ़ा. इस दौरान बीएसई का 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स 16.87 फीसदी ही चढ़ा. इस तरह स्मॉलकैप शेयरों ने निवेशकों को सेंसेक्स निफ़्टी के मुकाबले भारी मुनाफा कमा कर दिया है।
आर्थिक बुनियाद में सुधार और भारी खुदरा निवेशकों की भागीदारी के कारण साल 2023 इक्विटी बाजार के लिए लाभदायक वर्ष साबित हुआ है। इससे स्मॉल कैप और मिड कैप कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया. बाजार के जानकारों का कहना है कि शेयर बाजारों में तेजी का रुख लंबे समय से जारी है। मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट बड़े शेयरों से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस साल 20 दिसंबर को स्मॉलकैप इंडेक्स 42,648.86 अंक के अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया और उसी दिन मिडकैप इंडेक्स भी 36,483.16 अंक के अपने शिखर पर पहुंच गया. बीएसई इंडेक्स भी 20 दिसंबर को 71,913.07 अंक के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। बता दें कि मिडकैप इंडेक्स उन कंपनियों को ट्रैक करता है जिनका मार्केट कैप औसतन ‘ब्लू चिप’ कंपनियां का पांचवां हिस्सा है, जबकि स्मॉल-कैप कंपनियां उसके दसवें हिस्से के आसपास होती हैं।
जानकारों ने इस साल इक्विटी बाजार में तेजी का श्रेय बेहतर घरेलू व्यापक आर्थिक बुनियादी बातों और खुदरा निवेशकों के विश्वास को दिया। उनका कहना है कि जब समग्र अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, तो स्मॉलकैप और मिडकैप खंड अच्छा प्रदर्शन करते हैं। बाजार के जानकारों उम्मीद जताई है कि 2023 इक्विटी बाजार के लिए एक एक “बड़ा वर्ष” साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 में भारी तेजी के बाद छोटे शेयरों में निकट अवधि में सुधार देखने को मिल सकता है।

