नई दिल्ली: कोरोना महामारी के दौर में आरबीआई ने लोन की ईएमआई के मामले में बड़ी राहत दी थी. आरबीआई ने कोरोना महामारी के कारण घोषित लॉकडाउन के कारण लोगों को यह राहत दी थी. लोगों को उम्मीद थी कि महामारी का प्रकोप अभी भी जारी है, इसलिए लोन मोरेटोरियम की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए. हालांकि इस पर सुप्रीम कोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में नया हलफनामा दायर किया है. हलफनामें में आरबीआई ने कहा है कि लोन मोरेटोरियम को अब छह महीने से अधिक बढ़ाना अब संभव नहीं है.
आरबीआई के मुताबिक इसे छह महीने से अधिक बढ़ाने पर यह लोगों के क्रेडिट व्यवहार को प्रभावित कर सकती है और इससे लोगों के बीच कर्ज अनुशासन खत्म हो सकता है. इस कदम से अर्थव्यवस्था में कर्ज निर्माण की प्रक्रिया पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और इससे छोटे कर्जदारों पर अधिक असर पड़ सकता है. सुप्रीम कोर्ट मार्च से अगस्त के बीच छह महीने तक की ईएमआई पर ब्याज माफी की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.
लोन मोरेटोरियम मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि ‘ब्याज पर ब्याज’ माफी को लेकर केंद्र द्वारा दाखिल किया गया हलफनामा संतोषजनक नहीं है. इसलिए कोर्ट ने केंद्र सरकार और आरबीआई से दोबारा हलफनामा दाखिल करने को कहा है. इससे पहले दाखिल किए गए हलफनामे में केंद्र सरकार ने एमएसएमई और अन्य पर्सनल लोन 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ‘ब्याज पर ब्याज’ माफ करने को कहा था और इसका बोझ खुद उठाने की बात कही. 3 सितंबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 31 अगस्त तक जो खाते एनपीए घोषित नहीं हुए हैं, उन्हें अगले आदेश तक किसी और खाते को एनपीए नहीं घोषित करना है.

