रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट का भविष्य किसके हाथों में होगा इसके लिए उनके सौतेले भाई नोएल टाटा एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं। नोएल टाटा ट्रस्ट के भीतर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, वर्तमान में सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट दोनों के वो ट्रस्टी हैं ये ट्रस्ट टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी को भी नियंत्रित करते हैं।
टाटा समूह में नोएल टाटा का करियर 2000 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ, उन्हें टाटा इंटरनेशनल का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया,जिसके बाद अटकलें लगाई जाने लगीं कि नोएल को कंपनी के मुखिया के तौर पर तैयार किया जा रहा है। लेकिन 2011 में साइरस मिस्त्री जो नोएल ले साले हैं को रतन टाटा का उत्तराधिकारी घोषित किया। मगर बात जल ही बिगड़ गयी और अक्टूबर 2016 में उन्हें टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया। इस झगड़े के बाद रतन टाटा ने चार महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन के रूप में ज़िम्मेदारी संभाली और 2017 में नटराजन चंद्रशेखरन को चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया।
नोएल टाटा एक लो प्रोफाइल वाले व्यक्ति हैं और पब्लिक लाइफ में ज़्यादा नहीं रहते उनका ध्यान ज़्यादातर समूह के अंतरराष्ट्रीय संचालन और खुदरा कारोबार पर रहता है। नोएल की शादी आलू मिस्त्री से हुई है जो पल्लोनजी मिस्त्री की बेटी हैं, जो टाटा संस में सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारक थे। ट्रस्ट में टाटा परिवार की मौजूदगी को और मजबूत करते हुए, नोएल के बच्चों, लिआ (39), माया (36) और नेविल (32) को भी सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़े पांच प्रमुख ट्रस्टों के ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है। ये ट्रस्ट, जो टाटा समूह के धर्मार्थ और महत्वपूर्ण वित्तीय हितों का प्रबंधन करते हैं, टाटा संस में समूह की विशाल हिस्सेदारी की देखरेख के लिए जिम्मेदार हैं। इससे ट्रस्ट के भीतर उनकी भूमिका न केवल प्रतीकात्मक बल्कि समूह के भविष्य के शासन को आकार देने के लिए आवश्यक हो जाती है।

