नई दिल्ली: वैश्विक रेटिंग एजेंसी Moody’s Investors Service का मानना है कि कोरोना महामारी के चलते क्रेडिट में जो गिरावट आई है, वह कम समय के लिए है लेकिन दुनिया भर की अधिकतर अर्थव्यवस्था कोरोना से पहले के लेवल पर अगले साल 2022 तक पहुंचेगी. पिछले साल 2020 में 11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना को महामारी घोषित किया था और उसके बाद दुनिया भर में इसने अपना कहर ढाया. इसके चलते दुनिया भर की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुईं और बांड डिफॉल्ट्स के चलते क्रेडिट डाउनटर्न (क्रेडिट में गिरावट) आई.
मूडीज ने अपनी वैश्विक रिपोर्ट में कहा कि Covid-19 के चलते दुनिया भर में क्रेडिट से जुड़ी चुनौतियां आई लेकिन इसमें गिरावट कुछ समय तक और रहेगा. मूडीज का अनुमान है कि वैश्विक रिकवरी की रफ्तार धीमी होगी और मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक को लेकर अनिश्चितता सामान्य से अधिक बनी रहेगी. मूडीज का कहना है कि म्यूटेशंस के कारण कोरोना वायरस के साथ जीने की आदत डालनी होगी.
मूडीज के मुताबिक महामारी की रफ्तार धीमी होने के बाद पॉलिसी एक्शंस इकोनॉमिक एक्टिविटी और फाइनेंसियल मार्केट्स को सहारा देंगे. पॉलिसीमेकर्स लंबे समय तक इकोनॉमिक एक्टिविटी को सपोर्ट करते रहेंगे और कुछ मामलों में वे वर्षों तक सहारा देंगे.
मूडीज ने उम्मीद जताई है कि वैक्सीनेशन कार्यक्रम तेज होने पर इस साल 2021 में महामारी धीरे-धीरे कम हो जाएगी. इससे सरकारों को लॉकडाउन से जुड़े निर्देशों में ढील देने में मदद मिलेगी. हालांकि जहां पर वैक्सीनेशन प्रोग्रेस धीमी रहेगी, वहां कोरोना संक्रमण से जुड़ी चिंताएं बनी रहेंगी.

