नई दिल्ली: ट्विटर और सरकार के बीच विवाद अब चरम पर पहुंच गया है. आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री रविशंकर प्रसाद की ओर से ट्विटर को इंटरमीडियरी नियमों का पालन न करने पर नतीजे भुगतने के कुछ ही घंटों बाद उसके खिलाफ एफआईआर कर दी गई. गाजियाबाद में पुलिस ने ट्विटर इंडिया और दो कांग्रेस नेताओं सममेत समेत नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. बुधवार को ही रविशंकर प्रसाद ने एक के बाद एक ट्वीट करके कहा था कि ट्विटर को खुद को ‘अभिव्यक्ति की आजादी के झंडाबरदार’ के रूप में पेश करता है, मगर इंटरमिडियरी गाइडलाइंस का पालन न करने का रास्ता चुनता है. हालांकि ट्विटर ने मंगलवार को कहा था कि उसने अंतरिम चीफ कंप्लायंस ऑफिसर नियुक्त कर लिया है. वह जल्द ही इस अफसर के बारे में पूरी जानकारी सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ साझा करेगा.
दरअसल सरकार की शिकायत है कि ट्विटर रेजिडेंशियल ग्रिवांस अफसर, नोडल अफसर और चीफ कंप्लायंस अफसर नियुक्त करने के मामले में गाइडलाइंस का पालन करने में नाकाम रहा है. इससे आईटी एक्ट 79 के तहत एक सोशल मीडिया इंटरमीडियरी के तौर पर ट्विटर को जो सुरक्षा मिली हुई है , वो खत्म हो जाएगी. इस सेक्शन में कहा गया कि किसी भी इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म पर किसी थर्ड पार्टी की ओर से कोई सूचना,डेटा या लिंक साझा किया जाता है तो इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं होगा. अगर ट्विटर से सेक्शन 79 की सुरक्षा हटा ली जाती है तो इसे कंटेंट पब्लिशर मान कर इसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर तो नहीं कहा है कि ट्विटर ने आईटी एक्ट के सेक्शन 79 की सुरक्षा खो दी है लेकिन गाजियाबाद पुलिस की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि सरकार ने इसके खिलाफ कार्रवाई का मन बना लिया है. हालांकि सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें भी आई हैं कि सरकार ने ट्विटर का इंटरमीडियरी स्टेटस हटा लिया है.

