मशहूर उद्योगपति रतन टाटा का निधन हो गया है। उन्होंने 86 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज चल रहा था। टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन और पद्म विभूषण रतन टाटा जी के निधन पर एक दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की गई है। मुंबई में 28 दिसंबर 1937 को जन्म लेने वाले रतन टाटा का पालन पोषण उनकी दादी ने किया क्योंकि उनके पिता नवल टाटा और मां सूनी टाटा 1948 में अलग हो गए थे ।
पूरा देश अपने देश की शान बिजनेस आइकॉन के निधन पर शोकाकुल है, फिर वो चाहे उद्योग जगत हो, राजनीति की दुनिया हो या फिर फिल्म जगत हो. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखर ने अपने बयान में कहा कि हम अत्यंत क्षति की भावना के साथ श्री रतन नवल टाटा को अंतिम विदाई दे रहे हैं। उनके अतुलनीय योगदान ने न केवल टाटा समूह को आकार दिया बल्कि हमारे राष्ट्र का मूल ताना-बाना भी बुना। टाटा समूह के लिए श्री टाटा एक चेयरपर्सन से कहीं अधिक थे।
31 मार्च, 2024 तक टाटा ग्रुप का कुल मार्केट कैप 365 अरब डॉलर था। लेकिन टाटा ग्रुप का ये विराट कारोबार यूं ही यहां तक नहीं पहुंचा। टाटा ग्रुप को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए रतन टाटा ने मजदूरों की तरह काम किया है।
टाटा संस की तरफ से इस मौके पर जारी बयान में कहा गया है कि हम अत्यंत क्षति की भावना के साथ श्री रतन नवल टाटा को फाइनल फेयरवेल दे रहे हैं। उनके अतुलनीय योगदान ने न केवल टाटा ग्रुप को आकार दिया बल्कि हमारे राष्ट्र का मूल ताना-बाना भी बुना। टाटा ग्रुप के लिए वो एक चेयरपर्सन से कहीं अधिक थे।
पीएम मोदी ने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके रतन टाटा के निधन पर दुख जताया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रतन टाटा जी के सबसे अनूठे पहलुओं में से एक ये था कि उन्हें बड़े सपने देखने का जुनून था। उनका मन रतन टाटा के साथ अनगिनत संवादों से भरा हुआ है। राहुल गाँधी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सन्देश में रतन टाटा को एक दूरदर्शी व्यक्ति बताया जिसने व्यवसाय और परोपकार दोनों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

