फाइनेंस डेस्क – RBI के डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव ने सलाह दी है कि अब क्रेडिट की जानकारी सिर्फ हर दो हफ्ते में नहीं, बल्कि रियल टाइम यानी तुरंत मिलनी चाहिए। इससे बैंकों और लोन देने वाली कंपनियों को पता चल सकेगा कि कौन कब लोन चुका रहा है या नहीं चुका रहा — और ग्राहक को भी बेहतर अनुभव मिलेगा।
उन्होंने कहा कि अभी जो सिस्टम है, उसमें लोन की जानकारी हर 15 दिन में अपडेट होती है। लेकिन अगर ये जानकारी तुरंत मिलने लगे, तो बैंक लोन देने से पहले ज्यादा अच्छे से जांच कर पाएंगे और किसी का लोन रिकॉर्ड साफ है या नहीं, ये भी तुरंत पता चलेगा।
राव ने बताया कि इसके लिए टेक्नोलॉजी और प्रोसेस में बदलाव करने की जरूरत होगी। लेकिन फायदा इससे बड़ा होगा — पारदर्शिता, भरोसा और काम करने की रफ्तार सब कुछ सुधर जाएगा।
अभी देश में चार बड़ी क्रेडिट एजेंसियां ये काम कर रही हैं – CIBIL, Equifax, Experian और CRIF High Mark। ये एजेंसियां लोन और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करती हैं और बैंक-एनबीएफसी जैसी संस्थाओं को देती हैं। इन्हीं के आधार पर लोन मिलता है या नहीं।
राव ने एक और ज़रूरी बात कही — उन्होंने कहा कि हर ग्राहक की यूनिक पहचान होनी चाहिए, जिससे हर जगह एक ही जानकारी दिखे। अभी अलग-अलग जगह अलग पहचान पत्र की वजह से गड़बड़ी हो सकती है।
उन्होंने बताया कि भारत में घरेलू लोन भी बढ़े हैं। GDP के मुकाबले ये 43% तक पहुंच गया है। लेकिन अच्छी बात ये है कि ये उधार लेने वालों की संख्या बढ़ने से हुआ है, न कि लोगों के सिर चढ़े भारी लोन से।

