केंद्र सरकार विनिवेश प्रक्रिया को फिर तेज करने की तैयारी में है। किसी नई चीज पर सरकार भले ही विचार नहीं कर रही है लेकिन चालू वित्त वर्ष में जो निर्णय लिए गए थे लेकिन लागू नहीं हो पाए थे उन्हों फैसलों को इस बार पूरा किया जायेगा। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने आईडीबीआई बैंक के अलावा शिपिंग कॉरपोरेशन, एनएमडीसी स्टील, बीईएमएल और एचएलएल लाइफकेयर सहित कई सीपीएसई की रणनीतिक बिक्री का फैसला लिया था। बता दें कि अंतरिम बजट 2024-25 में सरकार ने विनिवेश और संपत्ति मौद्रीकरण से 50 हज़ार करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट रखा है।
पिछले साल वेदांता ने अपनी वैश्विक जस्ता परिसंपत्तियों को एचजेडएल को बेचने की योजना बनाई थी। सरकार के पास एचजेडएल के बोर्ड में निदेशक का पद है। सरकार ने मूल्यांकन की चिंता की वजह से कंपनी के इस कदम का विरोध किया था। अग्रवाल के स्वामित्व वाली एचजेडएल का इरादा अब कंपनी को तीन अलग इकाइयों में बांटने का है। प्रवर्तक वेदांता समूह की एचजेडएल में 64.92 प्रतिशत की इक्विटी हिस्सेदारी है। वहीं सरकार के पास कंपनी का 29.54 प्रतिशत हिस्सा है। शेष पांच प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है।
चालू वित्त वर्ष 2023-24 में जिन निजीकरण सौदों को पूरा करने है इनमें आईडीबीआई बैंक और बीईएमएल का निजीकरण शामिल है। दीपम के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में भारी मूल्य सृजन हुआ है। इसकी वजह सकारात्मक भारतीय अर्थव्यवस्था के बीच मजबूत प्रदर्शन, वृद्धि की संभावनाएं, पूंजी पुनर्गठन, स्थिर लाभांश नीति के साथ-साथ एक उचित विनिवेश रणनीति है। दीपम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी का प्रबंधन करता है। विभाग ऐसे सीपीएसई के निजीकरण पर भी काम कर रहा है, जिनमें संभावित बोलीदाताओं की ओर से शुरुआती रुचि पत्र (EOI) मिल चुके हैं।

