2023 में पीली धातु ने करीब 15% का एक अच्छा रिटर्न दिया है और साल 2024 में भी अच्छे रिटर्न की उम्मीद जताई जा रही है। सोने में और माल कमाने की बात इसलिए हो रही है क्योंकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपने सबसे आक्रामक ब्याज दर वृद्धि कार्यक्रम के समापन का संकेत दिया है। महंगाई में अच्छी-खासी गिरावट के संकेतों के साथ ही केंद्रीय बैंक द्वारा 2024 में तीन बार ब्याज दरों में कटौती करने की उम्मीद है। मार्च 2024 से संभावित दर कटौती पर बाजार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। यह बदलाव डॉलर इंडेक्स पर नीचे की ओर दबाव डाल सकता है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में और गिरावट आएगी। जिससे सोने के लिए कुल मिलाकर माहौल मजबूत होगा।
IMF के अनुसार, साल 2022 से ही प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी किये जाने के चलते वैश्विक आर्थिक विकास धीमा पड़ने की संभावना है। यह परिदृश्य एक भरोसेमंद एसेट के रूप में सोने की ओर आवंटन को बढ़ावा देता है। मिडिल-ईस्ट तनाव में किसी भी इजाफे की स्थिति में सोना सेफ हैवन एसेट के रूप में मजबूत होगा। केंद्रीय बैंक पिछले 13 वर्षों से लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप हाल के दिनों में भारी भंडार जमा हुआ है। आने वाले समय में भी केंद्रीय बैंकों की तरफ से अच्छी डिमांड देखने को मिल सकती है, क्योंकि ये डॉलर पर अनपी निर्भरता कम कर रहे हैं।
बाजार के जानकार बता रहे हैं कि सोने के लिए प्रमुख सपोर्ट लेवल ₹59,500 और ₹58,700 प्रति 10 ग्राम पर आंका गया है। कीमतों में गिरावट खरीदारों को आकर्षित कर सकती है। इससे कीमतें साल 2024 में करीब ₹72,000 प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंच सकती हैं। वहीँ मजबूत औद्योगिक मांग से चांदी के प्रति निवेशकों का आकर्षण बना हुआ है। साल 2023 में वैश्विक स्तर पर चांदी 20 से 26 डॉलर प्रति औंस के दायरे में ट्रेड करती दिखी है। 26 डॉलर प्रति औंस या ₹78,500 प्रति किलो के स्तर से ऊपर जाने के बाद चांदी में 30 डॉलर प्रति औंस या 85,000-88,000 रुपये प्रति किलोग्राम के लिए एक स्ट्रॉंग मोमेंटम देखने को मिलेगा।

