नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रत्न एवं आभूषण उद्योग से गुणवत्ता और उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान करते हुए कहा है कि प्रगति के लिए नए सिरे से सोचने, फिर से तैयार होने और प्रथाओं एवं प्रक्रियाओं को दोबारा डिजाइन किया जाना चाहिए।
श्री गोयल ने गुरुवार को यहां कहा कि आत्मनिर्भर बनने के लिए, रत्न एवं आभूषण उद्योग को नए सिरे से सोचने, फिर से तैयार होने और प्रथाओं एवं प्रक्रियाओं को दोबारा डिजाइन करने की जरुरत है ताकि आगे की प्रगति सुनिश्चित हो सके।
‘आभूषणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता : खनन, उत्पादन और बाजार’ विषय पर भारतीय उद्योग परिषद (सीआईआई) के डिजिटल रत्न एवं आभूषण सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री गाेयल ने कहा कि रत्न एवं आभूषण का क्षेत्र, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा से अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, रूस, सिंगापुर, हांगकांग, आदि के बाजारों में जगह बनाने में कामयाब हुआ है। भारत अपने रत्न एवं आभूषण क्षेत्र – अपने उत्पादों को आकर्षक एवं किफायती बनाने और ईमानदार काम -के लिए दुनिया भर में अच्छी तरह से पहचाना जाता है।
श्री गोयल ने कहा कि कोविड महामारी ने देश के संकल्प की परीक्षा ली और रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को एक बड़ा झटका लगा। लेकिन, इस क्षेत्र के हाल के निर्यात और घरेलू आंकड़े बताते हैं कि इस उद्योग ने नए माहौल में फिर से वापसी करने के लिए नवीनता, सरलता और अंगीकरण का उपयोग किया। इस उद्योग ने समस्या का सामना करने की अपनी दृढ़ क्षमता को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि हमारे रत्नएवं आभूषण उद्योग की एक खास मानसिकता है जो समकालिक प्रकृति की है, जो बदलते समय के साथ बदलती है और दुनिया भर में हमारी ताकत का लाभ उठाती है।
श्री गोयल ने कहा, “अगर हम अपनी विश्वसनीयता बना पाये, तो मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि हम अपने बाजारों का विस्तार करने और भारत से दुनिया की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होंगे। इसमें प्रौद्योगिकी, नवाचार और कौशल विकास को अपनाना शामिल होगा।”

