मुंबई: घटते ग्राहक आधार और बढ़ते घाटे के कारण सरकारी टेलिकॉम कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिए मोदी सरकार का एक निर्णय संजीवनी साबित हो सकता है. केंद्र सरकार ने हाल ही में अपने सभी मंत्रालयों, सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी बैंकों में बीएसएनएल और एमटीएनएल की टेलीकॉम सेवाएं लेना अनिवार्य किया है.
इससे बीएसएनएल और एमटीएनएल को सरकारी उपक्रमों से बड़ी मात्रा में इंटरप्राइजेज बिजनेस मिलेगा, जो बल्क बिजनेस होने के कारण इन घाटे से त्रस्त कंपनियों के लिए बड़ी राहत प्रदान करेगा और बाजार में टिके रहने में मददगार (Helpful) सिद्ध होगा. पिछले कुछ वर्षों में इस बिजनेस का एक बड़ा हिस्सा निजी कंपनियों ने हथिया लिया था, लेकिन अब वापस बीएसएनएल और एमटीएनएल के पास आ जाएगा.
केंद्र सरकार ने 12 अक्टूबर को लिए गए अपने निर्णय में अपने उपक्रमों और विभागों में इंटरनेट, ब्रॉडबैंड लैंडलाइन और लीज्ड लाइन जरूरतों के लिए बीएसएनल, एमटीएनएल नेटवर्क का इस्तेमाल अनिवार्य किया था. इसके बाद अब सभी मंत्रालय अपने अधीन पीएसयू के लिए निर्देश जारी कर रहे हैं. 26 अक्टूबर को उर्जा मंत्रालय ने भी एनटीपीसी, पावरग्रिड, एनएचपीसी सहित सभी उर्जा पीएसयू को बीएसएनल, एमटीएनएल नेटवर्क की सेवाएं लेने का निर्देश जारी कर दिया. सरकारी निर्देश के बाद अब बीएसएनल, एमटीएनएल के अधिकारी सरकारी उपक्रमों से इंटरप्राइजेज बिजनेस निजी कंपनियों से वापस लेने में जुट रहे हैं.

