लंबी अवधि के निवेश में म्यूचुअल फंड और नेशनल पेंशन सिस्टम यानि NPS पैसा बनाने के लिए अच्छे उत्पाद माने जा रहे हैं। लेकिन आम निवेशक अक्सर इस कन्फ्यूजन में रहते हैं कि इनमें से बेहतर कौन सा विकल्प है। तो चलिए हम आपका कन्फ्यूजन दूर करने की कोशिश करते हैं।
एनपीएस एक लॉन्ग टर्म का निवेश उत्पाद है। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इसका चयन मुख्य रूप से किया जाता है। रिटायरमेंट के बाद इसको रेगुलर इनकम देने के लिए डिजाइन किया गया है। दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड मिड से लॉन्ग टर्म में पैसा बनाना, टैक्स बचत, रिटायरमेंट समेत कई बड़े खर्चों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसमें निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार अपना लक्ष्य तय सकते हैं।
एनपीएस अधिक सुरक्षित और कम अस्थिर है क्योंकि NPS में इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश नहीं होता है, जबकि म्यूचुअल में ज्यादातर फंड केवल इक्विटी यानी शेयर में निवेश करते हैं। अगर आप शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं तो आपको एनपीएस का विकल्प चुनना चाहिए। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए भी एनपीएस में निवेश करना बेहतर विकल्प होगा।
एनपीएस में पैसा लगाने वालों को इनकम टैक्स की धारा 80 CCD(1B) के तहत 50 हजार रुपये की अतिरिक्त टैक्स मिलता है। साथ ही टैक्स छूट, कैपिटल एप्रिसिएशन पर टैक्स छूट और पेंशन कॉर्पस के 60% पर कर छूट के साथ वार्षिकी उत्पाद खरीदने पर टैक्स छूट मिलती है। वहीं ईएलएसएस म्यूचुअल फंड ही टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं।
एनपीएस टियर 1 निवेश में सेवानिवृत्ति तक लॉक-इन पीरियड होता है। वहीँ ज़्यादातर इक्विटी म्यूचुअल फंड में लॉक-इन पीरियड नहीं होता है। इसलिए अगर आप लॉन्ग टर्म के पीरियड से बचना चाहते हैं तो आप ईएलएसएस म्यूचुअल फंड का चयन कर सकते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में अधिक रिटर्न प्रदान करता है लेकिन जोखिम अधिक होता है, म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में 14-16% रिटर्न देते हैं। वहीं एनपीएस योजनाओं में जोखिम नहीं होता और आम तौर पर 10-12% रिटर्न देती हैं, इसलिए, किसी को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश उद्देश्य के मुताबिक विकल्प का चयन करना चाहिए।

