मुंबई: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने रिजर्व बैंक से सभी ऋणों को मार्च 2021 तक एक बार पुनर्गठित करने की अनुमति मांगी है।
एनबीएफसी का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन (बंद) की वजह से उनके ग्राहकों को धन की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उन्हें ऐसा करने दिया जाए।एनबीएफसी ने उन्हें बैंकों का ऋण चुकाने पर दी गयी मोहलत को आगे बढ़ाने की भी मांग रखी है। साथ ही रिजर्व बैंक से ऋण प्रावधान नियमों में छूट और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से पुनर्वित्त के रूप में अतिरिक्त कोष उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है।
एनबीएफसी कंपनियों की प्रतिनिधि संस्था वित्त उद्योग विकास परिषद (एफआईडीसी) के अनुसार इस संबंध में रिजर्व बैंक के साथ सोमवार को एक बैठक हुई। बैठक के दौरान कंपनियों ने ये सुझाव रखे। एफआईडीसी ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी और बंद के चलते उनके अधिकतर ग्राहकों के नकदी प्रवाह में बाधा आयी है। इसके चालू वित्त वर्ष में लंबे समय तक बने रहने की संभावना है। सबसे ज्यादा प्रभावित लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) , ट्रांसपोर्टर और ठेकेदार हुए हैं।
परिषद ने एक बयान में कहा कि ऋणों को एक बार पुनगर्ठित करने की अनुमति मार्च 2021 तक के लिए दी जाए। इसके तहत परिसंपत्तियों के वर्गीकरण में बदलाव के बगैर मासिक किस्त को फिर से तय करने, ऋण की अवधि बढ़ाने जैसे संशोधन करने की मंजूरी दी जाए जो ग्राहकों की नकदी हालत के अनुरूप हो।

