भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक शुरू हो चुकी है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद ये तीसरी बैठक है, पहली बैठक 3-5 अप्रैल और दूसरी 5-7 जून को हुई थी। बदले वैश्विक हालात में इस बार RBI की यह मौद्रिक नीति बैठक काफी अहम होने वाली है। फरवरी 2023 से RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार रेपो रेट में कटौती का फैसला लिया जाएगा। अगर रेपो रेट में कटौती होती है तो होम लोन, कार लोन समेत सभी लोन सस्ते हो जाएंगे। अगर रेपो रेट स्थिर रहती है तो ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। 8 अगस्त को RBI की मौद्रिक नीति समिति अपना फैसला सुनाएगी।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट को 6.50 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए क्योंकि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में 7-8 फीसदी की स्थिर वृद्धि के बावजूद मुद्रास्फीति के मोर्चे पर सब कुछ ठीक नहीं है। जून 2024 में मुद्रास्फीति के 5 फीसदी के आंकड़े को पार करने के बाद ये चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि लगातार मुद्रास्फीति के दबाव के बीच आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में दरों में कटौती से परहेज कर सकता है, क्योंकि अगर ब्याज दर बढ़ाकर 6.5 फीसदी (रेपो रेट) भी कर दी जाती है तो आर्थिक वृद्धि अच्छी रहेगी।
अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में उच्च वृद्धि के साथ-साथ चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 4.9 फीसदी की मुद्रास्फीति यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में रुख बना रही है। उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 की बैठक में रुख में बदलाव या दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि यदि अच्छे मानसून तथा वैश्विक या घरेलू झटकों के अभाव में खाद्य मुद्रास्फीति अनुकूल होती है तो अक्टूबर, 2024 में रुख में बदलाव संभव है। इसके बाद दिसंबर, 2024 और फरवरी, 2025 में ब्याज दरों में 0.25-0.25 प्रतिशत की कटौती हो सकती है।

