गिरती मांग के कारण गुजरात का हीरा उद्योग संकट में है। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कारीगरों को कंपनी से निकाला जाने लगा है और हजारों श्रमिकों पर छंटनी की तलवार लटक रही है। बता दें कि अकेले सूरत शहर में 6 लाख हीरा कारीगरों को रोजगार मिलता है। वहीं, शेष गुजरात में सिर्फ 3 लाख कारीगरों को रोजगार मिलता है।
गौरतलब है कि प्राकृतिक रूप से कटे हीरों की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी किरण जेम्स एंड डायमंड्स समेत गुजरात के सूरत में कई हीरा इकाइयों ने 17 अगस्त से 28 अगस्त तक 10 दिनों के लिए परिचालन बंद करने का फैसला किया है। किरण जेम्स में फिलहाल 50,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं, जिनमें से ज्यादातर सूरत में कार्यरत हैं। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को लंबी छुट्टियां देने का विकल्प चुन रही हैं तो अन्य ने काम के घंटे कम करने या कार्यदिवस कम करने का फैसला किया है। इसका कारण कंपनियों के पास बढ़ती अनसोल्ड इन्वेंट्री, गिरती कीमतें, रूस-यूक्रेन युद्ध और घटता निर्यात है।
बता दें कि सूरत में इस समय करीब 3500 हीरा कटिंग और पॉलिशिंग इकाइयां चालू हैं। कई इकाइयां काम के घंटे कम करके संकट का सामना कर रही हैं। काम न मिलने के कारण सूरत की फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों को सप्ताह में दो से तीन दिन की छुट्टी दी जा रही है। हालात बिगड़ते देख कारोबारियों ने गुजरात सरकार से मंदी के कारण नौकरी गंवाने वाले और आत्महत्या करने वाले हीरा कारीगरों के लिए आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा करने की मांग की है। सूरत के हीरा उद्योग में करीब 800,000 श्रमिक कार्यरत हैं, जो 5,000 से अधिक प्रसंस्करण इकाइयों के माध्यम से देश के 80% कच्चे हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग का काम संभालते हैं।
यूक्रेन के साथ युद्ध में फंसने के कारण रूसी हीरे के आयात में गिरावट आई है। इसके कारण सूरत के हीरा कारीगर बेरोजगार हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश में कच्चे हीरों के आयात में 29% की गिरावट आई है। अगर रूस से हीरे का आयात इसी तरह गिरता रहा तो स्थिति और खराब होने की संभावना है। भारतीय रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) द्वारा वित्त वर्ष 24 के लिए प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार रत्न एवं आभूषणों का कुल सकल निर्यात 32.02 बिलियन डॉलर (2.63 लाख करोड़ रुपये) रहा, जो पिछले वर्ष के आंकड़ों की तुलना में करीब 15 फीसदी की गिरावट दर्शाता है।

