अमेज़न और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों पर सस्ते मूल्य निर्धारण प्रथाओं में लिप्त होने का आरोप लगाने के एक दिन बाद ही कामर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल तीखे तेवर ढीले पड़ गए, एक दिन बाद ही उन्हें अपनी बात से पिछड़ते हुए ये बात कहनी पड़ी कि सरकार ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के खिलाफ नहीं है। गोयल ने कहा, “देश केवल ग्राहक तथा वस्तुओं और सेवाओं के आपूर्तिकर्ता के प्रति ईमानदारी चाहता है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हमारे लोगों को भी ऐसे ऑनलाइन व्यवसायों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने का उचित अवसर मिले।”
उन्होंने कहा कि भारत “बिल्कुल भी ऑनलाइन के खिलाफ नहीं है।” उनकी नयी टिप्पणी उनके कल के भाषण का बदला हुआ रूप है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में ई-कॉमर्स की तेजी से वृद्धि देश में संचालित छोटे और मंझोले दुकानदारों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए गर्व की बजाय चिंता का विषय है। 21 अगस्त को दिल्ली में एक कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि भारत में अमेज़न द्वारा किए गए बड़े निवेश से जश्न मनाने की कोई बात नहीं है, क्योंकि यह पैसा केवल कंपनी के घाटे को पूरा करने के लिए लगाया गया है। गोयल ने कहा था कि अमेज़न को भारी घाटा इसलिए हुआ क्योंकि वह शिकार करने वाले मूल्य निर्धारण का पालन करता है।
अब एक दिन बाद मुंबई में एक कार्यक्रम में वो ऑनलाइन ई-कॉमर्स के जबरदस्त फायदे गिना रहे थे और कह रहे थे कि इसमें सुविधा का लाभ है, इसमें गति की सुविधा है।” भारत में, वैश्विक ई-कॉमर्स कंपनियां मार्केटप्लेस व्यवसायों के रूप में स्वतंत्र रूप से काम कर सकती हैं।

