होम देने के लिए बैंक और NBFC कम्पनियाँ फिक्स्ड रेट या फ्लोटिंग रेट ऑफर करती हैं। इन दोनों विकल्पों में किसी एक का चुनाव लोन लेने वाले को करना पड़ता है। अब इनमें से आपके लिए बेहतर रेट क्या है इसे समझना बहुत ज़रूरी होता है लेकिन सबको इसके बारे में जानकारी नहीं होती। तो चलिए हम इस बारे में आपको कुछ जानकारी देते हैं ताकि जब आप होम लोने लेने का मन बनाये तो आप का माइंड क्लियर हो कि आपको फिक्स्ड रेट चाहिए या फ्लोटिंग रेट.
बता दें कि एक निश्चित दर वाला लोन कुछ ख़ास फायदे लाता है। लॉन्ग टर्म के लिए फाइनेंसियल प्लानिंग बनाने वाले व्यक्ति के लिए लॉन्ग टर्म के लिए फिक्स्ड दर पर लोन अधिक अनुमानित होता है क्योंकि देनदारी पता होती है। इस बात को भी समझना जरूरी है क्योंकि बैंक जिस तरह से फ्लोटिंग रेट्स को एडजस्ट करता है वह काफी पेचीदा है। बढ़ती ब्याज दर के सिनेरियो में निश्चित दर वाला लोन बहुत मायने रखता है।
होम लोन देने वाले बैंक के जोखिम के चलते निश्चित दर वाले लोन पर औसत लागत 100 से 200 बीपीएस ज्यादा होती है। इससे आपकी ब्याज लागत और मासिक क़िस्त बढ़ जाती है। अगर इंटरेस्ट रेट कम होता है तो निश्चित दर लोन आपके लिए नुकसानदेह है क्योंकि आपको बाज़ार दर से ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। निश्चित दर वाले लोन का एक और नुकसान यह है कि वे सिर्फ एक पॉइंट तक ही तय होते हैं।
वहीँ फ्लोटिंग रेट लोन में ब्याज की दर बैंक दर, PLR आदि जैसे इंटरनल बेंचमार्क के साथ चेंज होती है। फ्लोटिंग ब्याज दरों वाले होम लोन ज्यादातर मामलों में आधार दर से जुड़ा होता है। आमतौर पर देखा जाता है कि दरों में बदलाव तभी किए जाएंगे जब दरों में न्यूनतम सीमा में बदलाव हो। इसीलिए आज होम लोन के लिए फ्लोटिंग रेट लोन ज्यादा पॉपुलर हैं। इसीलिए फ्लोटिंग रेट लोन को एक बेहतर विकल्प कहा जाता है।

