वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज शुक्रवार को संसद में चालू वित्त वर्ष के लिए पेश किये गए आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत के बीच रह सकती है। सर्वेक्षण में अगले साल भी आर्थिक गतिविधियां धीमी रहने का अनुमान जताया गया है, हालाँकि महंगाई काबू में रहने की बात कही गयी है वहीँ खपत स्थिर रह सकती है।
सर्वेक्षण रिपोर्ट को वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने तैयार किया है। इसमें कहा गया है कि आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत को विकसित देश बनाने के लिए अगले एक-दो दशक तक औसतन करीब 8% की स्थिर जीडीपी वृद्धि हासिल करने की जरूरत है। सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘इस वृद्धि दर लक्ष्य पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि वैश्विक वातावरण (राजनीतिक और आर्थिक) भारत के विकास परिणामों को प्रभावित करेगा।’
विनिर्माण क्षेत्र में कमजोरी और कॉरपोरेट निवेश में सुस्ती के कारण वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की वृद्धि दर गिरकर 6.4% रहने का अनुमान है, जो चार वर्षों में सबसे धीमी वृद्धि है और वित्त वर्ष 2023-24 में दर्ज की गई वृद्धि की तुलना में तीव्र गिरावट है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही। भारतीय अर्थव्यवस्था 2022-23 में 7.2 प्रतिशत और 2021-22 में 8.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी।
मुद्रास्फीति के बारे में सर्वेक्षण में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में कमोडिटी की कीमतों में तेजी का जोखिम सीमित लगता है। हालांकि, वैश्विक दबाव अभी भी एक मुद्दा है। सब्जियों की कीमतों में मौसमी गिरावट और खरीफ फसलों की आवक के साथ वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति कम होने की उम्मीद है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों से निपटने के लिए रणनीतिक और विवेकपूर्ण नीति प्रबंधन के साथ-साथ घरेलू बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी। इसमें कहा गया है कि उच्च सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और बेहतर व्यावसायिक उम्मीदों के साथ निवेश गतिविधि में तेजी आने की उम्मीद है।

