भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगातार पांचवीं बार रेपो रेट में बदलाव नहीं किये जाने से उन लोगों को बड़ी निराशा हुई जिन्होंने होम लोन ले रखा था , उन्हें उम्मीद थी कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया इस बार ज़रूर उन्हें रेपो रेट घटाकर EMI में राहत देगा। बता दें कि रेपो रेट 6.50% पर बना हुआ है। हालाँकि रियल एस्टेट डेवलपर्स केंद्रीय बैंक के इस फैसले से ज़्यादा मायूस नहीं है. उसका मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था मज़बूत दिख रही है और घर खरीदने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ी है तो ऐसे में रेपो रेट न घटने से रियल सेक्टर पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ने वाला, अलबत्ता ये बात ज़रूर है कि रेपो रेट में अगर कमी होती तो रियल एस्टेट की मार्किट और बूम करती.
डेवेलपर्स का मानना है कि रेपो दर बरकरार रखने फैसला दर्शाता है कि देश के आर्थिक और बुनियादी विकास की संभावनाओं में लोगों को विश्वास है। वित्त वर्ष 2024 में 7% से जीडीपी दर से बढ़ने की उम्मीद जताई गयी है जो नए साल के लिए एक आशावादी माहौल का निर्माण करती है। डेवेलपर्स का मानना है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति घोषणा में दिए गए सकारात्मक संकेतकों से रियल एस्टेट क्षेत्र की मजबूत वृद्धि में योगदान मिलेगा, विशेष रूप से अफोर्डेबल हाउसेस की कैटेगरी में, हालांकि मौजूदा ब्याज दर पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। डेवेलपर्स को उम्मीद है कि आरबीआईअगली समीक्षा बैठक में इस पर ज़रूर विचार करेगा।
डेवेलपर्स के मुताबिक देश में प्रॉपर्टी की रिकॉर्ड मांग पिछले तीन सालों से बनी हुई है। रियल एस्टेट सेक्टर में उछाल की वजह साफ है कि लोगों में भरोसा बढ़ा है कि उनका जॉब और कारोबार सुरिक्षत है इसलिए वो घर बनाने के सपने को पूरा कर रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि लोगों में महंगे और बड़े घर की मांग तेजी से बढ़ी है इसलिए आने वाले समय में अगर रेपो रेट में कटौती होगी तो मांग में और तेजी देखने को मिलेगा। कुल मिलाकर रियल एस्टेट के ज़्यादातर डेवेलपर्स रेपो रेट में बदलाव न होने से मायूस नहीं हैं, वो केंद्रीय बैंक के इस फैसले में आर्थिक स्थिरता को देख रहे हैं.

