कोयला खनन का काम करने वाली देश की दिग्गज सरकारी कंपनी कोल इंडिया के निजीकरण को लेकर सरकार ने सवालों का जवाब दिया है। कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कंपनी के निजीकरण की चर्चाओं को लेकर कहा, ‘कोल इंडिया के निजीकरम का कोई सवाल ही नहीं है। हम कंपनी को लगातार मजबूत कर रहे हैं और प्रोत्साहित कर रहे हैं।
कोल इंडिया को 1 बिलियन टन उत्पादन की ओर बढ़ने की जरूरत है। सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोल इंडिया की हरसंभव मदद करेगी।’ उन्होंने कहा कि कोल इंडिया 2023-24 तक 1 बिलियन टल कोयला के उत्पादन के लक्ष्य को हासिल कर लेगी।
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कोल इंडिया के पास 50 से 60 सालों के लिए कोयले के उत्पादन के लिए ब्लॉक मौजूद हैं। दरअसल कोयले के उत्पादन में निजी निवेश को अनुमति देने और कमर्शियल माइनिंग का ऐलान करने के बाद से लगातार विपक्षी दल और मजदूर संगठन निजीकरण की ओर कदम बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं।
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कोल इंडिया लिमिटेड में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश का फैसला लिया गया है।
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कोल इंडिया के लिए यह एक बड़ा अवसर है जब कंपनी नई खदानें खोलते हुए अधिक से अधिक कोयला उत्पादन कर देश में हो रहे कोयले के आयात की भरपाई कर सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में कोल इंडिया अपने उत्पादन से सालाना 100 मिलियन टन कोयले के आयात की भरपाई करेगी।
गौरतलब है कि सरकार ने 1971 में कोकिंग और 1973 में नन कोकिंग कोयला की खदानों के राष्ट्रीयकरण का फैसला लिया था। उसके बाद यह पहला मौका है, जब कोयला उद्योग फिर निजीकरण की ओर अग्रसर हो रहा है।

