नई दिल्ली: कोल इंडिया की सब्सिडियरी भारत कोकिंग कोल के पास अपने 42,000 कर्मचारियों को अप्रैल की सैलरी देने के लिए पैसे नहीं हैं। कंपनी को पिछले कुछ हफ्तों से ग्राहकों से कोई पेमेंट नहीं मिली है, जिसके चलते यह स्थिति बनी है। कंपनी के ग्राहकों में अधिकतर पब्लिक सेक्टर की कंपनियां हैं, जो अभी भी उधारी पर कोयला ले रही है। ऐसे में एग्जिक्यूटिव्स को डर है कि कंपनी को जल्द उत्पादन बंद करने का फैसला लेना पड़ सकता है।
कोल इंडिया के एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, ‘लॉकडाउन के दौरान पावर प्लांट्स को नकदी संकट का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते बिजली कंपनियों पर 3,200 करोड़ से अधिक का बकाया हो गया है। यह कोल इंडिया की किसी भी सब्सिडियरी की सबसे अधिक बकाया रकम है।’
उन्होंने बताया, ‘पूरी वर्किंग कैपिटल कोयले के उत्पादन और ग्राहकों (पब्लिक सेक्टर की कंपनियां) को सप्लाई करने में ही खर्च हो रही है। इसके चलते सैलरी देने, पीएफ जमा करने, या रॉयल्टी और सेस देने सहित दूसरे वैधानिक बकायों को चुकाने के लिए कोई पैसा नहीं बच रहा है।’ रॉयल्टी नहीं दे पाने की असमर्थता के चलते कंपनी को अपना ऑपरेशन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है क्योंकि यह टैक्स तब लगता है, जब कोयले का उत्पादन होता है।

