वित्त मंत्री द्वारा पेश किये जाने वाले केंद्रीय बजट को वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) द्वारा तैयार किया जाता है। इसमें आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के अनुमानित व्यय और आय का विवरण होता है। प्रस्तुत किए जाने के बाद बजट विधायी प्रक्रिया से गुजरता है, जिसमें संसद में विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पारित किए जाते हैं। इन दोनों विधेयकों को कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदनों और राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता होती है। इसके बाद ये वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही लागू हो जाते हैं।
जिस वर्ष लोकसभा चुनाव होने होते हैं, उस वर्ष चुनाव से पहले अंतरिम बजट और बाद में नई सरकार द्वारा पूर्ण बजट पेश किए जाने का प्रावधान है। इस बार अंतरिम बजट फरवरी में पेश किया गया क्योंकि अप्रैल से मई तक चुनाव होने थे। अंतरिम बजट के माध्यम से नए वित्तीय वर्ष में सरकार के गठन के संभावित समय तक बचे हुए महीनों के लिए व्यय की अनुमति संसद से ली जाती है। फिर चुनाव के बाद नई सरकार शेष वित्तीय वर्ष के लिए पूर्ण बजट पेश करती है।
अंतरिम बजट में नई सरकार के गठन तक राजस्व और व्यय का अनुमान पेश किया जाता है। इस वित्त वर्ष में अप्रैल 2024 से जुलाई 2024 तक 4 महीनों में जो खर्च होना था, उसे अंतरिम बजट के ज़रिए संसद ने मंज़ूरी दे दी थी। अब यह पूर्ण बजट बचे हुए वित्त वर्ष के लिए लागू होगा। इस तरह यह पूर्ण बजट अगस्त 2024 से मार्च 2025 तक लागू रहेगा।

