रिटायरमेंट के बाद खर्च कैसे चलेगा, नौकरीपेशा लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही होती है? क्योंकि सिर्फ जीवन में जो बचत की है सिर्फ उसी का सहारा होता है. ऐसे में अगर सही तरीके से प्लानिंग करके बचत की होती है तो रिटारयमेंट के बाद भी पैसे की किल्लत नहीं होती। यहाँ हम बताने जा रहें है कि रिटायरमेंट के बाद पैसे की कमी नहीं हो, इसकी प्लानिंग कैसे करें.
विशेषज्ञों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद अपने खर्च को वर्गीकृत करना चाहिए। रिटायरमेंट के बाद खरीदारी, यात्रा दवा जैसे नियमिल खर्चे होते हैं। इसके अलावा एक आपातकालीन निधि की भी ज़रुरत होती। एमर्जेन्सी कभी आ सकती है, विशेषकर जब आपकी उम्र बढ़ गयी हो, इसलिए आपको इसके लिए तैयार रहना होगा। महंगाई आपके बचत पर हमेशा असल डालती है, यह भी अपने प्लान में शामिल करना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक नौकरी शुरू होने के साथ अपनी 30 फीसदी आय को किसी न किसी रूप में बचाना और निवेश करना शुरू कर देना चाहिए। निवेश के बहुत से तरीके हैं जिनमें एसआईपी भी एक तरीका है. इसके जरिये आप अलग—अलग म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। हाइब्रिड म्यूचुअल फंड लंबी अवधि के लिए बेहतर होते हैं क्योंकि इसमें डेट और इक्विटी दोनों का संयोजन होता है। डेट फंड कम जोखिम वाले होते हैं, जबकि इक्विटी फंड जोखिम तो देता है लेकिन रिटर्न भी काफी अच्छा मिलता है.
आमतौर पर देखा गया है कि रिटायरमेंट इन्वेस्टमेंट के रूप में लोग किराये की आय, सोने की बचत या सावधि जमा जैसे सेकंडरी विकल्पों पर निर्भर रहते हैं। ये विकल्प भी अच्छे हैं लेकिन आपके पास FD और इक्विटी में भी निवेश होना चाहिए। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान एक बेहतरीन स्कीम है जिसके जरिये निवेशक एक तय राशि म्यूचुअल फंड स्कीम से वापस पाते हैं। कितने समय में कितना पैसा निकालना है, यह विकल्प निवेशक चुनते हैं।

