बिना सोचे-समझे किसी भी बैंक में या किसी भी टाइम पीरियड के लिए एफडी कराना घाटे का सौदा है, क्योंकि हर बैंक में एफडी पर ब्याज दर अलग-अलग होती है, साथ ही अलग-अलग अवधि पर ब्याज दर भी अलग-अलग होती है. इसके अलावा कई बैंक तय दरों पर एफडी की पेशकश करते हैं तो कई बैंक फ्लोटिंग रेट पर एफडी करते हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि आपके लिए फायदेमंद क्या है? फिक्स्ड रेट या फ्लोटिंग रेट.
दोनों के बीच क्या अंतर होता है, चलिए इसकी जानकारी आपको देते हैं. फ्लोटिंग रेट एफडी का रिटर्न आरबीआई के रेपो रेट या ट्रेजरी बिल पर आधारित होता है। मतलब जब रेपो रेट बदलेगा तो फ्लोटिंग रेट एफडी पर ब्याज दर भी बदल जाएगी। जबकि फिक्स्ड एफडी पर ब्याज दर तय एक अवधि के लिए लॉक होती है, मतलब कोई भी बदलाव नहीं है. अभी RBI ने 8 दिसंबर अपनी मौद्रिक नीति की बैठक में रेपो दर को लगातार पांचवीं बार अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। अब रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है तो फ्लोटिंग रेट भी वही रहेगा। अब सवाल उठता है कि क्या फ्लोटिंग-रेट फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करना चाहिए? तो विशेषज्ञों के मुताबिक हाई रिटर्न वाली एफडी में अपना पैसा निवेश करने का यह सबसे अच्छा समय है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों के लिए फ्लोटिंग-रेट फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश न करना ही बेहतर होगा क्योंकि RBI ने ब्याज दरें घटाने के संकेत दिए हैं इसलिए फिक्स्ड रेट एफडी में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद है. क्योंकि जब ब्याज दरें लगातार बढ़ने के संकेत हों तभी फ्लोटिंग रेट एफडी में निवेश करना सही रहता है और अधिक रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

