नई दिल्ली: बिजली वितरण रिफॉर्म के जरिए पावर सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा रिफॉर्म होने जा रहा है। कंज्यूमर अब किंग होगा। इसके अलावा अगले वित्त वर्ष में पावर सेक्टर की कुछ कंपनियों के मर्जर के साथ सरकार हिस्सेदारी भी बेच सकती है।
ऊर्जा मंत्री आर के सिंह का कहना है कि इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में रिफॉर्म होने जा रहा है। मौजूदा कंपनियां अपना काम करती रहेंगी। नई कंपनियों को सेक्टर में आने का रास्ता खुलेगा। कंपनियों को अब लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है। कोई भी कंपनी रजिस्ट्रेशन करा कर बिजली बेच सकती है। उन्होंने बताया कि टैरिफ की अधिकतम सीलिंग स्टेट रेगुलेटर तय करेगा। कंपनियां सीलिंग से कम टैरिफ पर बिजली दे सकती हैं।
सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार भविष्य में Exchange Traded Fund यानि ETF का रास्ता नहीं अपनाएगी। सूत्रों के मुताबिक ETF के निवेशकों की मुनाफावसूली में हड़बड़ी की वजह से सरकारी कंपनियों के लॉन्ग टर्म वैल्यूएशन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। सरकारी कंपनियों के वैल्यूएशन गिरने से रोकने के प्लान के तहत अब हिस्सा बेचने के लिए ETF का इस्तेमाल नहीं होगा। सरकार का Bharat 22, CPSE ETF की नई किस्त लाने का इरादा नहीं है। शेयर बाजार में तेजी के बावजूद CPSE शेयरों में तेजी नहीं आई है। सरकार चाहती है निवेशक लंबे समय तक CPSE में होल्ड करें।

