कोरोना महामारी के कारण अस्त-व्यस्त हुई इकोनॉमी को सुधारने के लिए केंद्र सरकार राहत पैकेज जारी कर चुकी है और रिफॉर्म्स किये हैं. अब इसे लेकर फिच रेटिंग्स का कहना है कि सरकार के इस कदम से मीडियम टर्म में इकोनॉमिक ग्रोथ रेट बढ़ सकती है. हालांकि रेटिंग एजेंसी का यह भी कहना है कि सरकार द्वारा किए गए राहत पैकेज से अगर इंवेस्टमेंट और उत्पादकता को बढ़ावा मिलता है तो ही मीडियम ग्रोथ रेट बढ़ेगी. फिच रेटिंग्स ने यह भी कहा कि ग्रोथ को कम करने वाले दबाव भी काम कर रहे हैं. ऐसे में रेटिंग एजेंसी का कहना है कि इसके मूल्यांकन में समय लग सकता है कि रिफॉर्म्स प्रभावी तरीके से लागू हुआ या नहीं.
फिच के मुताबिक महामारी ने मीडियम टर्म ग्रोथ को धीमा किया है क्योंकि इसने कॉरपोरेट बैलेंस शीट को को नुकसान पहुंचाया है जिससे अगले कुछ वर्षों तक उनके निवेश पर बुरा प्रभाव पड़ा सकता है. इसके अलावा नए एसेट क्वालिटी नियमों से बैंको और कम लिक्विडिटी के कारण ग्रोथ पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है और मीडियम टर्म के लिए सरकार ने जो कर्ज का लक्ष्य निर्धारित किया है, उससे अधिक कर्ज लेना पड़ सकता है.
फिच का मानना है कि मीडियम टर्म ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि सरकार निवेश और उत्पादकता को सहारा दे. इसके अलावा रेटिंग एजेंसी ने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ वर्षों तक सुधार जारी रखेगी. चालू वित्त वर्ष के लिए फिच रेटिंग्स का अनुमान है कि इंडियन इकोनॉमी 10.5 फीसदी की दर से सिकुड़ सकती है. महामारी के कारण संसद ने कृषि बिल समेत कई रिफॉर्म्स किए जिससे मीडियम टर्म ग्रोथ को बढ़ावा मिल सकता है.

