ग्लोबल इक्विटीज में निवेश भी जोखिम के अधीन है लेकिन इसे डायवर्सिफिकेशन के द्वारा कम जरूर किया जा सकता है. इसका बेहतर तरीका है इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड में निवेश करना. अगर आप भी ऐसा करने की सोच रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंड में ओवरसीज इन्वेस्टमेंट की लिमिट बढ़ा दी है. इनडिविजुअल फंड हाउस के लिए यह लिमिट अब 30 करोड़ डॉलर से बढ़कर 60 करोड़ डॉलर हो गई है. इसके अलावा डोमेसिटक म्यूचुअल फंड द्वारा ओवरसीज ईटीएफ (ETF) में भी निवेश की लिमिट 5 करोड़ डॉलर से बढ़ाकर 20 करोड़ डॉलर कर दिया है.
सेबी ने कहा कि जो म्यूचुअल फंड हाउस विदेशी निवेश से जुड़ी नई स्कीमें या ईटीएफ पेश करने का विचार कर रहे हैं, उन्हें सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि स्कीम दस्तावेजों में उनके द्वारा निवेश की गई राशि भी बताई जाना चाहिए. एनएफओ की अंतिम तारीख से छह महीने तक इन दस्तावेजों की मान्यता होती है.
जारी सर्कुलर में सेबी ने कहा कि इसके बाद म्यूचुअल फंडों के पास विदेश बाजारों की सिक्योरिटीज या ईटीएफ में अनुपयोगी सीमा की शेष राशि का निवेश करने का अवसर नहीं होगा और इसके बाद वे इंडस्ट्री की सीमा में शामिल होंगी. नियामक ने कहा कि विदेशी बाजार या ईटीएफ में निवेश करने वाली या अनुमति प्राप्त कर चुकी स्कीमों अपने बीते तीन महीने की औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) का 20 फीसदी तक का निवेश विदेशी बाजार में कर सकते हैं. फंड हाउसेज को निवेश सीमा उपयोग की मासिक रिपोर्ट सेबी को सौंपनी होगी.

