नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) विधेयक पारित हो गया. इस विधेयक के जरिए सहकारी (को-ऑपरेटिव) बैंकों को रिजर्व बैंक के सुपरविजन में लाने का प्रस्ताव किया गया है. लोकसभा में इस विधेयक की वकालत करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम इस संशोधन को जमाकर्ताओं को प्रोटेक्ट करने के लिए लाने की कोशिश कर रहे हैं. बैंकों में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा होने पर जमाकर्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
वित्त मंत्री ने कहा कि 277 शहरी सहकारी बैंकों का वित्तीय स्टेटस कमजोर है. 105 सहकारी बैंक मिनिमम रेगुलेटरी कैपिटल जरूरत को पूरा करने में असमर्थ हैं. 47 बैंकों की नेटवर्थ निगेटिव है. 328 शहरी सहकारी बैंकों का ग्रॉस NPA रेशियो 15 फीसदी से भी अधिक है.
सीतारमण ने यह भी कहा कि बिल सहकारी बैंकों को रेगुलेट नहीं करता है. संशोधन सहकारी बैंकों को केन्द्र सरकार द्वारा टेक ओवर कर लिए जाने को लेकर नहीं है. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि किसी प्रावधान के जरिए रिजर्व बैंक को कुछ और पावर दिए जा रहे हैं.

