ग्लोबल इकॉनमी की ग्रोथ रेट 2024 में लगातार तीसरे साल भी धीमा रहेगा और इसकी वजह उच्च ब्याज दरें, उच्च मुद्रास्फीति, व्यापार में मंदी के साथ-साथ चीन में मंदी रहेगी ये आंकलन विश्व बैंक ने मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट में किया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल इकॉनमी की ग्रोथ दर इस साल केवल 2.4 फीसदी रहेगी. पिछले साल यानि 2023 में यह 2.6 प्रतिशत, 2022 में 3.0 प्रतिशत और 2021 में 6.2 प्रतिशत थी। 2021 में मजबूत ग्रोथ की वजह 2020 की महामारी के बाद तेजी से आर्थिक सुधार था।
रिपोर्ट के मुताबिक इज़रायल-हमास युद्ध और यूक्रेन में लड़ाई से पैदा अंतररष्ट्रीय तनाव से भी इस कमजोर विकास पूर्वानुमान को खतरा है। विश्व बैंक के अधिकारियों ने चिंता जताई है कि कर्ज में डूबे गरीब देश जलवायु परिवर्तन और गरीबी से निपटने के लिए आवश्यक निवेश नहीं कर पाएंगे। विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल ने अपने एक बयान में कहा है कि निकट भविष्य में विकास दर कमजोर रहेगी. इससे कई विकासशील देश, विशेषकर गरीब देश कर्ज के जाल में फंस जायेंगे। कर्ज़ का स्तर गिर जाएगा और तीन में से एक व्यक्ति को भोजन तक पहुँचना मुश्किल हो जाएगा।
विश्व बैंक की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था ने एक के बाद एक झटके के सामने आश्चर्यजनक लचीलापन दिखाया है। महामारी, रूस का यूक्रेन पर आक्रमण, लंबे समय तक वैश्विक मुद्रास्फीति और मूल्य वृद्धि को नियंत्रण में लाने के लिए केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतिगत दर में बढ़ोतरी ने विकास पर असर डाला है। लेकिन इन सबके बावजूद ग्लोबल इकॉनमी 2023 में जून के अनुमान से आधा प्रतिशत अधिक तेजी से बढ़ी है, साथ ही वैश्विक मंदी का ख़तरा भी कम हो गया है.

