नई दिल्ली: रेरा (RERA) कानून की वजह से रियल स्टेट कारोबारी और खरीदारों के बीच खोया विश्वास फिर से कायम करने में मदद मिली है. जल्द ही हमें यह देखने को मिलेगा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले बिल्डर ही बाजार में टिकेंगे. यह बात यूपी रेरा के चेयरमैन राजीव कुमार ने मंगलवार को पीएचडी चैंबर के एक वर्चुअल कार्यक्रम में कही. राजीव कुमार ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर में देश की विकास दर (GDP) को दोगुना करने की क्षमता है. रेरा कानून की वजह से खरीदार अब बाजार में वापस लौट रहे हैं. जिससे अंततः रियल एस्टेट सेक्टर को ही फायदा होगा
यूपी रेरा चेयरमैन का कहना है कि कम बेहतर प्रदर्शन वालों को अपना प्रदर्शन सुधारना होगा और बदनाम बिल्डरों को अपना कारोबार बंद करना पड़ेगा. करीब 20 फीसदी बिल्डर ही इस तीसरी श्रेणी में आते हैं. जिनके कारोबारी तौर तरीके आपत्तिजनक और कानून के विरुद्ध हैं. इनकी वजह से ही आज रेरा (Real Estate Regulatory Authority) जैसे कानून की जरूरत पैदा हुई है. रेरा कानून की सफलता सही मायनों में तब मानी जाएगी. जब रेरा अदालत में शिकायतें आना बेहद कम या खत्म हो जाए.
कार्यक्रम में उद्योगपति व पीएचडी चैंबर के यूपी चेयरमैन ललित खेतान ने कहा कि केंद्रीय रेरा कानून को लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है. पूरे देश में रेरा का पहला कॉनक्लेव भी उत्तर प्रदेश में ही आयोजित किया गया था. घर खरीदारों की समस्याओं को सुलझाने के लिए यूपी रेरा अथॉरिटी प्रभावी भूमिका निभा रही है. कोविड के दौरान भी वर्चुअल अदालतों के माध्यम से रेरा ने पीड़ितों को न्याय देखकर बेहतर काम किया है.

