प्रोविडेंट फण्ड के फाइनल सेटलमेंट क्लेम की रिजेक्शन दर पिछले पांच साल में बढ़कर 34 फीसद पर पहुंच गई है जो पहले 13 प्रतिशत पर थी. इसका मतलब ये हुआ कि हर तीन में से एक क्लेम रिजेक्ट हो रहा है. 2022-23 में PF फाइनल सेटलमेंट के कुल 73 लाख 87 हजार क्लेम EPFO के पास आए, जिनमें से 24 लाख 93 हजार क्लेम रिजेक्ट हो गए. तो चलिए जानते हैं कि गलती कहाँ हो रही है और इतनी भारी मात्रा में क्लेम रेजेट क्यों हो रहे हैं.
दरअसल जब आप अपने प्रोविडेंट फण्ड खाते से पैसे निकालने के लिए क्लेम करते हैं तो उसमें UAN नंबर, EPFO में शामिल होने की तारीख, बैंक खाता, KYC का ब्योरा मांगा जाता है. EPFO में दर्ज ब्योरे से जब इनमें से कोई जानकारी मेल नहीं खाती तो क्लेम खारिज हो जाता है.
दरअसल क्लेम रिजेक्ट होने का आंकड़ा ऑनलाइन प्रोसेसिंग के चलते बढ़ा है. पहले कंपनी क्लेम के दस्तावेज की जांच करती थी. इसके बाद यह EPFO के पास आता था. मगर जबसे से आधार से जोड़ कर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर जारी किया गया है तबसे लगभग 99 फीसदी क्लेम ऑनलाइन पोर्टल के जरिए ही हो रहे हैं.
आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 के दौरान एपफओ को 73.87 लाख फाइनल सेटेलमेंट के क्लेम मिले. जिनमें से 24.93 लाख क्लेम रिजेक्ट कर दिए गए. जबकि 2017-18 में यह आंकड़ा 13 फीसदी और 2018-19 में 18.2 फीसदी रहा था. 2019-20 में रिजेक्शन रेट 24.1 फीसदी, 2020-21 में 30.8 और 2021-22 में 35.2 फीसदी पहुँच गया. ईपीएफओ के पास लगभग 29 करोड़ सब्सक्राइबर हैं. EPFO का दावा है कि उसने 99 फीसदी क्लेम सेटल किए हैं, अगर ऐसा है तो लाखों क्लेम रिजेक्शन क्यों हो रहे हैं.

