सरकार को भी इस बात का अंदेशा पूरी तरह है। इसलिए श्रम मंत्रालय ने लॉकडाउन के मद्देनजर निजी कंपनियों से अपील की है कि वह अपने कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकालें साथ ही ऑफिस नहीं आने पर वेतन नहीं काटे। कई निजी कंपनियां ऐसी भी हैं जिसने बयान जारी कर अपने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि वे निश्चिंत होकर काम करें। कंपनी नौकरी से निकालने के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोच रही है।
वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने अपने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया है कि कोविड-19 महामारी के बावजूद वह उनके वेतन में कटौती नहीं करेगी। कंपनी ने कहा कि इस महामारी से उसका कारोबार प्रभावित हुआ है लेकिन उसने जिन भी लोगों को नौकरी की पेशकश की है, उन्हें पूरा करेगी।
टाउनहॉल बैठक में फ्लिपकार्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कल्याण कृष्णमूर्ति ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि कंपनी कर्मचारियों, वेंडरों तथा विक्रेता भागीदारों के प्रति प्रतिबद्ध है। कृष्णमूर्ति ने यह भी आश्वासन दिया है कि कंपनी के कर्मचारियों के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। इसके अलावा जिनको भी नौकरी की पेशकश की गई है, उसे वापस नहीं लिया जाएगा।
कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के असर से नौकरियां जाने और वेतन में कटौती के खतरे के बीच टाटा ग्रुप ने ऐलान किया है कि वह देशभर में अपने ऑफिस और मैन्युफैक्चरिंग साइट्स पर काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों तथा दिहाड़ी मजदूरों को पूरा वेतन देगा। टाटा की कुछ कंपनियों जैसे टाटा प्रॉजेक्ट्स में भारी तादाद में अस्थायी कर्माचारी कंस्ट्रक्शन गतिविधियों से जुड़े हैं।
ऑटो सेक्टर पहले से बुरी हालत में है। मार्च के महीने में बजाज ऑटो की बिक्री में 38 फीसदी की भारी गिरावट आई है। बजाज ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज ने कहा है कि किसी कर्मचारी को काम पर निकालने की नौबत आने से पहले वह खुद अपनी सैलरी नहीं लेंगे। राजीव बजाज देश के सबसे ज्यादा वेतन लेने वाले अधिकारियों में से हैं और वित्त वर्ष 2019 में उन्हें 32 करोड़ रुपये की सैलरी मिली थी।

