अगस्त महीने में अब तक भारतीय इक्विटी बाजार से 13,400 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी हो चुकी है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल अब तक एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में 22,134 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। अमेरिका में मंदी की आशंकाओं के बीच एफपीआई ने यह निकासी की है।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के सह-निदेशक एवं शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने, खासकर इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण इसमें और तेजी आई। इसके कारण विदेशी निवेशकों ने अपना जोखिम कम किया। इसके अलावा भारतीय बाजारों के ऊंचे मूल्यांकन को देखते हुए विदेशी निवेशक मुनाफावसूली के लिए प्रेरित हुए।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि यदि बाजार में आगे भी तेजी बनी रहती है तो विदेशी निवेशक और बिकवाली कर सकते हैं। इसका कारण यह है कि भारतीय इक्विटी बाजार का मूल्यांकन तुलनात्मक रूप से ऊंचा बना हुआ है। आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने निकासी की है। इससे पहले जुलाई में आर्थिक वृद्धि के मजबूत बने रहने, सुधारों के जारी रहने और उम्मीद से बेहतर कंपनी नतीजों की उम्मीद के चलते 32,365 करोड़ रुपये का एफपीआई निवेश आया था। जून में भी राजनीतिक स्थिरता और बाजारों में तेज उछाल के चलते 26,565 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया।
इससे पहले मई में चुनावी झटकों के चलते एफपीआई ने 25,586 करोड़ रुपये और अप्रैल में मॉरीशस के साथ भारत की कर संधि में बदलाव को लेकर चिंताओं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जारी तेजी के चलते 8,700 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की थी। 31 जुलाई को समाप्त पखवाड़े में एफपीआई लगातार वित्तीय सेवा शेयरों में बिकवाली कर रहे थे। हालांकि, इस दौरान उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), ऑटोमोबाइल, पूंजीगत उत्पाद और धातुओं में खरीदारी की। वहीं, अगस्त में अब तक एफपीआई ने डेट बाजार में 6,261 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके साथ ही यह आंकड़ा साल 2024 में 97,249 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

