सरकार ने शहरी खुदरा विक्रेताओं को सस्ती घरेलू प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में 20 फीसदी तक की कटौती की है। सूत्रों का कहना है कि ऐसे में अगर ईंधन पर उत्पाद शुल्क नहीं घटाया गया तो वाहनों को दी जाने वाली सीएनजी की कीमत में 4 से 6 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हो सकती है। भारत के अंदर अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक के स्थलों से भूमिगत और समुद्र तल से नीचे से निकाली गई प्राकृतिक गैस ही वह कच्चा माल है जिसे वाहनों के लिए सीएनजी और रसोई में इस्तेमाल होने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) में बदला जाता है।
जानकारी के मुताबिक पुरानी फील्डों से होने वाले उत्पादन की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण है। इनका इस्तेमाल शहरी गैस खुदरा विक्रेताओं के लिए होता है। इन फील्डों से होने वाले उत्पादन में सालाना पांच फीसदी की कमी आ रही है। इसके चलते शहरी गैस वितरण कंपनियों को होने वाली आपूर्ति में कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि 16 अक्टूबर से आपूर्ति में कटौती कर सीएनजी की मांग का सिर्फ 50.75 फीसदी कर दिया गया है, जबकि पिछले महीने यह 67.74 फीसदी था। पुराने क्षेत्रों से प्राप्त गैस की कीमत 6.50 अमेरिकी डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) है, जबकि आयातित एलएनजी की कीमत 11-12 डॉलर प्रति यूनिट है।
वर्तमान में केंद्र सरकार सीएनजी पर 14 फीसदी उत्पाद शुल्क लगाती है, जो 14-15 रुपये प्रति किलोग्राम आता है। उन्होंने कहा कि अगर इसे कम किया जाता है, तो खुदरा विक्रेताओं को बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डालना पड़ेगा। सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी एक राजनीतिक मुद्दा भी है क्योंकि महाराष्ट्र में अगले महीने चुनाव होने हैं और दिल्ली में भी जल्द ही चुनाव होने वाले हैं।

