नयी दिल्ली: रिलायंस कैपिटल ने कहा है कि केयर रेटिंग्स द्वारा उसके बॉन्ड कार्यक्रम की रेटिंग घटाने के बाद वह अपना कर्ज समय से नहीं चुका पाएगी, जिसे आठ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से चुकाना था। रेटिंग गिरने से शीघ्र अदायगी का दबाव बढ गया है।
रिलायंस कैपिटल ने शनिवार रात शेयर बाजार को बताया कि वह परिसंपत्तियों के विमुद्रीकरण में सक्षम नहीं है और इसलिए कर्ज अदायगी में देरी होगी। केयर रेटिंग्स ने सितंबर 2019 में अनिल अंबानी के नियंत्रण वाली रिलायंस कैपिटल के पूरे बकाया ऋण कार्यक्रम की रेटिंग को घटाकर ‘‘केयर-डी’’ कर दिया था। कंपनी ने आपत्ति जताते हुए इस कदम को पूरी तरह पक्षपातपूर्ण और अनुचित कहा था।
केयर ने ब्याज के भुगतान में देरी के कारण रिलायंस कैपिटल के दीर्घकालिक ऋण कार्यक्रम, बाजार से जुड़े ऋणपत्रों और अधीनस्थ ऋण बकाया की रेटिंग घटा दी थी।

