नयी दिल्ली। सरकार ने राहत पैकेज में किसानों के लिए एक शानदार योजना शुरू की है। किसानों के लिए ‘वन फसल-वन नेशन’ योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत देश के किसी भी राज्य का किसान किसी भी अन्य राज्य के व्यापारी को अपनी फसल बेच सकेगा। उदाहरण के लिए अगर किसी यूपी के किसान को यूपी के किसी व्यापारी के बजाय हरियाणा के किसी व्यापारी से बेहतर दाम मिलेगा तो वे अपनी फसल उसी व्यापारी को बेच सकेगा। सरकार इसके लिए नियमों में बदलाव करेगी। इसके लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। ये व्यवस्था जीएसटी और वन नेशन वन राशन से मिलती जुलती है। जीएसटी के तहत पूरे देश में एक टैक्स व्यवस्था लाई गई जबकि वन नेशन वन राशन योजना के तहत पूरे देश में हर व्यक्ति का एक ही राशन कार्ड चलेगा।
इस योजना के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन किया जाएगा, जिसके जरिए अनाज, खाद्य तेल, ऑयलसीड, दालें, प्याज और आलू को विनियमित किया जाएगा। इससे कृषि सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को फायदा मिलेगा। हालांकि साथ ही किसानों के लिए स्टॉक की लिमिट भी लागू की जाएगी। आज वित् मंत्री ने पिछले 2 महीनों में किसानों के लिए उठाए गए कई अन्य कदमों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि, लॉकडाउन के दौरान रबी की फसल की कटाई के उपाय किए गए, कुछ राज्यों ने सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है, फसल बीमा योजना से किसानों को लाभ दिया, 6400 करोड़ रुपये का फसल बीमा भुगतान और लॉकजाउन में 74300 करोड़ रु के कृषि उत्पाद खरीदे।
इसके अलावा वित्त मंत्री ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज पर अपनी तीसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में 10000 करोड़ रुपये की एक खास योजना का ऐलान किया है। ये 10000 करोड़ रुपये की योजना माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज (एमएफई) के औपचारिकरण के लिए है। ये योजना पीएम नरेंद्र मोदी के ‘Vocal for Local’ को बढ़ावा देगी।

