नई दिल्ली। लगातार मंदी का असर बाजार पर देखने को मिल रहा है। प्रत्येक क्षेत्रों में हो रहे इस नुकसान से अब रोजगार का संकट आ खड़ा हुआ है और इसे देखते हुए मारूति सुजुकि ने भी अब छंटनी करनी शुरू कर दी है। जानकारी देते हुए कम्पनी के चेयरमेन आरसी भर्गव ने कहा कि मारुति सुजुकी इंडिया ने 3,000 कांट्रैक्ट (अस्थायी) कर्मचारियों की छंटनी की है।
यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री मांग में भारी कमी का सामना कर रही है। कंपनी की सालाना आम बैठक में भार्गव ने शेयरधारकों से कहा, ‘कारों की कीमतों में सुरक्षा मानदंडों और भारी टैक्स जोड़ दिए गए हैं। इससे ग्राहकों की खरीद क्षमता प्रभावित हो रही है।’
वाहन कंपनियों के प्रतिनिधि संगठन सियाम ने कहा है कि मंदी के कारण अब तक ऑटोमोबाइल सेक्टर में करीब 20 हजार कर्मियों की छंटनी हो गई है और 13 कर्मचारी कभी भी नौकरी गंवा सकते हैं।
मारुति सुजुकी ने बताई छंटनी की यह वजह
- जुलाई में पैसेंजर वाहनों का उत्पादन करीब 17 प्रतिशत घटा
- देश में तेज रफ्तार से घट रही है उपभोक्ता वस्तुओं की मांग
- एनबीएफसी के पास कार खरीदारों को कर्ज देने के लिए फंड नहीं
- जीएसटी के तहत टैक्स की ऊंची टैक्स दरों के कारण कीमतें बढ़ीं
- ऊंची बीमा लागत और ओला-ऊबर जैसी टैक्सी सर्विस की लोकप्रियता
और भी हैं कई अहम कारण:
बता दें कि इससाल लगातार मंदी का असर झेल रही कम्पनियों में कई फैक्टर ऐसे हैं जो लगातार क्षेत्रों में असर डाल रहे हैं। इस साल अब तक बंबई स्टॉक एक्सचेंज के ऑटो इंडेक्स में करीब 23 प्रतिशत गिरावट आई है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी का शेयर 2019 की शुरुआत से अब तक 20 प्रतिशत गिर गया है। वहीं रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में लगातार नौवें महीने वाहनों की बिक्री में गिरावट आई।
घरेलू अर्थव्यवस्था की मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का योगदान करीब 49 फीसदी है। इसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 3।5 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। जाहिर है, इस सेक्टर में मंदी का नकारात्मक असर नौकरियों और सरकार की आय पर होता है।

