एयरलाइन जेट एयरवेज ने 25 साल तक कामयाबी से उड़ान भरने के बाद पांच साल पहले अपने परिचालन को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की थी। अब एयरलाइन के परिसमापन के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसके दोबारा उड़ान भरने की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई है। ऐसे में कंपनी की सम्पत्तियों को बेचने की तैयारी चल रही है। ये संपत्तियांबैंकों के पास गिरवी राखी हैं जिनमें सबसे बड़ी संपत्ति मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद के एयरपोर्ट पर खड़े जेट एयरवेज के ग्यारह विमान हैं। मुंबई एयरपोर्ट पर तीन बोइंग 777, दो एयरबस ए330 और एक बोइंग 737 समेत छह विमान खड़े हैं। दिल्ली एयरपोर्ट पर दो बोइंग 777 और एक बोइंग 737 हैं, जबकि हैदराबाद एयरपोर्ट पर एक बोइंग 737 और एक एयरबस ए330 हैं।
बैंकों के अनुमान के मुताबिक इन विमानों से 1,000 करोड़ से 1,500 करोड़ रुपये तक की रकम मिल सकती है, हालांकि अंतिम मूल्यांकन लिक्विडेटर द्वारा निर्धारित किया जाएगा। अन्य परिसंपत्तियों में इंजन, सहायक बिजली इकाइयाँ (APU), विमान के पुर्जे और ग्राउंड उपकरण जैसे जनरेटर, टो ट्रैक्टर, वाहन, कंप्रेसर, कोच और ट्रॉलियाँ शामिल हैं।
जेट एयरवेज ब्रांड नाम भी बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसके अलावा, जेट एयरवेज के पास मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में एक वाणिज्यिक इमारत में आधी मंजिल है, जिसकी कीमत जून 2019 तक ₹245 करोड़ है। बैंकों को जेट एयरवेज के बैंक खाते में जमा लगभग ₹100 करोड़ को भुनाने का भी मौका मिलेगा। इसके अलावा जालान-कलरॉक कंसोर्टियम द्वारा जमा की गई लगभग ₹350 करोड़ की नकदी तक सीधी पहुँच भी बैंकों के पास है।
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को आदेश दिया कि वे अपनी समाधान योजना प्रस्तुत करते समय जालान-कलरॉक कंसोर्टियम द्वारा दी गई ₹150 करोड़ की प्रदर्शन बैंक गारंटी को भुनाएँ। कंसोर्टियम द्वारा एस्क्रो खाते में जमा किए गए ₹200 करोड़ को जब्त करने का भी आदेश शीर्ष अदालत ने दिया।

