हायर एजुकेशन की लागतार बढ़ती लागत से युवाओं के अभिवावकों की परेशानियां भी बढ़ती जा रही हैं, एक माध्यम वर्गीय परिवार के लिए अपने बच्चे के लिए उच्च शिक्षा दिलाना उसके बजट से बाहर हो गया हैं ऐसे में युवाओं को अपने माता पिता की आर्थिक हालत को देखकर मजबूरन एजुकेशन लोन की तरफ जाना पड़ रहा है। इन बच्चों को बैंकों से एजुकेशन लोन तो मिल जाता है लेकिन इसके बुरे प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं क्योंकि कई बच्चे कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।
शिक्षाविदों का मानना है कि विदेश में पढ़ाई करने की इच्छा रखने वालों को आर्थिक तनाव से बचाना बेहद जरूरी है, इसलिए हायर एजुकेशन के लिए लोन लेने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिनपर अमल करके परेशानियों से बचा सकता है या फिर कम किया जा सकता है. पहली बात, उधार लिए गए लोन की शर्तों और नियमों को ठीक से समझें। रीपेमेंट और अन्य विवरण बिल्कुल स्पष्ट होने चाहिए। ज्यादा खर्च वाले संस्थान या हॉस्टल का चुनाव आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। लोन को समय पर चुकाएं और टालने की कोशिश न बिलकुल न करें। इससे आपको थोड़े समय के लिए राहत जरूर मिलेगी लेकिन लोन की कुल राशि बढ़ती ही जाएगी।
कर्ज के जाल में फंसने से बचने के लिए एक इमरजेंसी फंड बनाएं। एक निश्चित राशि तय करें और एक अलग बजट निर्धारित करें। इससे आपको तब तक चीजों को ठीक करने में मदद मिलेगी जब तक आप आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हो जाते। रीपेमेंट प्लान बनाएं, इससे आपको पहले उच्च ब्याज वाले ऋणों का भुगतान करने और फिर अन्य ऋणों का भुगतान करने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। अनावश्यक खर्च से बचने की कोशिश करें क्योंकि ऐसी खरीदारी आप पर वित्तीय बोझ बढ़ाती है।

