कोरोनावायरस संक्रमण की सबसे तगड़ी मार सर्विस सेक्टर पर पड़ी है। देश के GDP में इसकी हिस्सेदारी करीब 55 फीसदी है। 19 मार्च को देश के नाम अपने संदेश में पीएम मोदी ने जनता कर्फ्यू लगाने को कहा है। प्राइवेट कंपनियां अपने कर्मचारियों वर्क फ्रॉम होम करने को कहा है। कोरोनावायरस के संक्रमण को देखते हुए Social Distancing अच्छा आइडिया है लेकिन इसका असर प्रोडक्टिविटी और कंजम्पशन पर पड़ रहा है। लिहाजा इसका असर नौकरियों पर भी पड़ा है।
अगर भारत में कोरनावायरस के संक्रमण का कम्युनिटी स्प्रेड होता है तो फिस्कल ईयर 2021 में GDP घटकर 3.5 फीसदी तक आ सकती है।
चीफ इकोनॉमिस्ट डीके जोशी कहते हैं कि मौजूदा Social Distancing का बुरा असर एयरलाइन कंपनियां, होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और मल्टीप्लेक्स पर पड़ा है। बिगड़ते हालात को देखते हुए फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने 20 मार्च को ऐलान किया था कि सरकार उन सेक्टर्स के लिए राहत पैकेज लेकर आएगी जिनका धंधा कोरोनावायरस की वजह से चौपट हुआ है।
सबसे ज्यादा दिक्कत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को हो रही है क्योंकि वहां घर से काम करना मुमकिन नहीं है। बैंकिंग और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के कारोबार में भी कर्मचारियों का ऑफिस में रहना जरूरी है। GDP का एक बड़ा हिस्सा कंजम्पशन है। ऐसे में अगर Social Distancing बढ़ती है तो इसका असर देश की इकोनॉमी पर होगा।
यहां अभी कोरोनावायरस का संक्रमण दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले कम है। दुनिया भर में 2 लाख से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हैं जबकि भारत में 250 लोग इसके चपेट में हैं। हालांकि आशंका है कि आने वाले दिनों में कोरोनावायरस का संक्रमण और तेजी से फैल सकता है।

